निवर्तमान कुलपति प्रो० रतनलाल हाँगलू के कारनामे बोलते हैं

■ इलाहाबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय– घोर भ्रष्टाचार के चंगुल में

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-

लेखक/चिन्तक डॉ• पृथ्वीनाथ पाण्डेय

उक्त विश्वविद्यालय के निवर्तमान कुलपति प्रो० रतनलाल हाँगलू से यद्यपि त्यागपत्र ले लिया गया है तथापि उनका साया अब भी विश्वविद्यालय और संघटित महाविद्यालयों के परिसरों में देखा जा रहा है। यौन-उत्पीड़न-शोषण-व्यभिचार इत्यादिक घटनाओं से कुछ देर के लिए अलग हटकर विचार करें तो वहाँ के वरिष्ठ अध्यापकों को अलक्षित कर, प्रो० हाँगलू ने “डंके की चोट” पर पदोन्नति किये थे। एक ही महाविद्यालय में पति भी अध्यापन कर रहे हैं तो पत्नियाँ भी सीना तानकर अध्यापक बनी हुई हैं। विश्वविद्यालय के कई विभागों, विशेषत: ‘हिन्दी-विभाग’ में एक साथ २० अध्यापकों की नियुक्तियाँ भी प्रो० हाँगलू की कृपादृष्टि के परिणामस्वरूप ही हुई हैं, जिनमें कुपात्रों की बड़ी संख्या है। विश्वविद्यालय और संघटक महाविद्यालयों के पुस्तकालयों में एक प्रकाशक की पुस्तकों की बड़ी संख्या में ख़रीदारी, उसी प्रकाशक के यहाँ से कथित कुलपति की पुस्तक का प्रकाशन तथा उसके परिवार की एक महिला को एक महाविद्यालय में अध्यापक बनाना प्रो० हाँगलू के वर्चस्व का ही परिणाम और प्रभाव था। विश्वविद्यालय के हिन्दी-विभाग और फ़ोटो जर्नलिज़्म विभाग के कुछ अध्यापकों का प्रो० हाँगलू के इर्द-गिर्द मँडराकर उनसे अनिधिकृत लाभ लेना भी जाँच का विषय बन जाता है।

अभी हाल ही में प्रो० हाँगलू के त्यागपत्र के स्वीकार करने के विरोध में ‘आक्टा’ के जिन अध्यापकों ने अध्यापन नहीं करने का निर्णय किया था, उन सभी के विरुद्ध इस विषय पर जाँच समिति का गठन होना चाहिए कि उन सभी को प्रो० हाँगलू की ओर से अवैध रूप में कौन-कौन-सी सुविधाएँ मिली थीं, जो अभी तक मिल रही हैं। यदि उक्त समस्त अनियमितताओं की निष्पक्षतापूर्वक जाँच करायी गयी तो प्रो० रतनलाल हाँगलू, हाँगलू के चारों ओर मँडरानेवाले चाटुकार अधिकारी तथा महाविद्यालयों के-की वर्तमान और निवर्तमान प्रधानाचार्य भी दोषी सिद्ध होंगे-होंगी।

(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ५ जनवरी, २०२० ईसवी)