प्रख्यात साहित्यकार श्री कैलाशनाथ पाण्डेय का शरीरान्त

प्रख्यात साहित्यकार श्री कैलाशनाथ पाण्डेय का कल (३ जनवरी) रात्रि में पी० जी० आइ०, लखनऊ में शारीरिक अस्वस्थता के कारण निधन हो गया था। वे लगभग ७४ वर्ष के थे। उनके सारस्वत मित्र आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने बताया कि प्रयागराज में बाघम्बरी गद्दी के समीप में उनका निवास था। वे कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। अचानक स्वास्थ्य गम्भीर हो जाने के कारण उन्हें पी० जी० आइ०, लखनऊ ले जाना पड़ा, जहाँ उनका शरीरान्त हो गया। उनके परिवार में उनके पत्नी-सहित पुत्र-पुत्रवधू-पौत्र हैं। आज उनका दारागंज, प्रयागराज में अन्तिम संस्कार कर दिया गया। उनके पुत्र श्री आदर्श पाण्डेय (अधिवक्ता) ने मुखाग्नि दी थी।

कविता, कहानी, निबन्ध आदि विषयों पर गम्भीर पकड़ रखनेवाले श्री कैलाशनाथ पाण्डेय अत्यन्त मिलनसार, मृदुभाषी तथा व्यावहारिक व्यक्ति थे। उन्होंने मारीशस, सूरीनाम, रूस आदिक देशों में जाकर हिन्दी की प्रतिष्ठा की थी। बैंक-सेवा से अवकाश-ग्रहण करने के पश्चात् वे पूरी तरह से साहित्य के प्रति समर्पित हो गये थे। उन्हें अनेक राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कारों-सम्मानों से आभूषित किया जा चुका था। उन्होंने कई मौलिक पुस्तकों की रचना की थी, जिनमें उनके तीन काव्य-संग्रह ‘यथार्थ की पंखुड़ियाँ’, ‘मनीषा’ तथा ‘प्रतिध्वनि’ अति चर्चित रहीं। श्री कैलाशनाथ पाण्डेय ने विदेशों में रामकथा का प्रचार-प्रसार करने में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान किया था।

श्री कैलाशनाथ पाण्डेय की स्मृति में आज (४ जनवरी) ‘सर्जनपीठ’ और ‘साहित्यांजलि प्रज्योदि’ के संयुक्त तत्त्वावधान में एक शोकसभा का आयोजन किया गया, जिसमें डॉ० रामनरेश त्रिपाठी, तलब जौनपुरी, मुकुल मतवाला, शिवराम गुप्ता, शिवमूर्ति सिंह, डॉ० रवि मिश्र, डॉ० प्रदीप चित्रांशी, ज्योति चित्रांशी, डॉ० पूर्णिमा मालवीय तथा आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने स्मृति-शेष कैलाशनाथ पाण्डेय से जुड़ी स्मृतियों को साझा करते हुए उनके प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।