मतदान आपकी जिम्मेदारी, ना मज़बूरी है। मतदान ज़रूरी है।

आया अब गणतन्त्र है, करो दिखावा आज

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

एक–
तन्त्र तैरता सिन्धु में, दिखे रेत-सा लोक।
खद्दर कलुषित हो गया, जनगणमन में शोक।।
दो–
बाबा मोदी! उठ रही, हर घर से है आह।
चाँदी चाचा शाह की, मुट्ठी में है वाह।।
तीन–
संविधान है जेब में, मनचाहा है खेल।
चोर मत कहो ‘चोर’ को, वरना होगी जेल।।
चार–
देश बाँटकर खा रहे, नेता जीव महान्।
घनचक्कर जनता बनी, सबके कच्चे कान।।
पाँच–
आया अब गणतन्त्र है, करो दिखावा आज।
समय समझता चाल सब, खोलेगा कल राज़।।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २६ जनवरी, २०२१ ईसवी।)