स्वाधार गृह की अधीक्षिका हुयी गिरफ्तार, संस्था संचालक की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित 

डीएम के निरीक्षण में 19 महिलाओ के नाम मिले थे फर्जी, तहसीलदार संडीला भी जांच कर दर्ज किये थे बयान 

                हरदोई- बेनीगंज में स्वाधार गृह मामले में आखिर एसपी विपिन कुमार मिश्र की बनाई गयी टीम ने स्वाधार गृह की अधीक्षिका आरती को गिरफ्तार कर लिया।हालाँकि संस्था संचालक अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। एसपी विपिन कुमार मिश्रा ने बताया कि संस्था संचालक की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगायी गयी है और शीघ्र ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पहले दिन डीएम के निरीक्षण में 19 महिलाओं के नाम फर्जी पाए गए थे। जबकि दो ही महिलाएं मौके पर मिली थी। इस पर डीएम ने कार्रवाई के आदेश दे दिए थे। जिस पर जिला प्रोबेशन अधिकारी की तहरीर पर स्वाधार गृह के संचालक व अधीक्षका के खिलाफ रिपार्ट दर्ज कर ली गई थी और मामले की जांच चल रही है ।संडीला तहसीलदार पंकज सक्सेना ने भी पहुंचकर बयान दर्ज किये थे।

                 बेनीगंज कस्बा में थाने से करीब पांच सौ मीटर की दूरी पर महिला स्वाधार गृह स्थित है। जो आयशा ग्रामोद्योग लोहानी पिहानी के माध्यम से संचालित है। इसके संचालक मोहम्मद रजी निवासी लोहानी थाना पिहानी के हैं। जहां पर आरती कानपुर के आनंद नगर निवासी अधीक्षका के रूप में काम कर रही है। यहां पर सोमवार को अचानक सीएम के फरमान के बाद डीएम पुलकित खरें ने इस केन्द्र पर छापा मारा। जहां पर कागजों पर 21 महिलाएं होने की इंट्री पाई गई। लेकिन जब मौके पर जांच की गई थी तो वहां पर 19 महिलाओ के नाम फर्जी पाए गए थे। मौके पर दो ही महिलाएं मिली। जिनसे डीएम ने पूरे मामले में पूछताछ की। इसके दूसरे दिन मंगलवार को भी जिला प्रोबेशन अधिकारी सुनील कुमार संडीला तहसीलदार पंकज सक्सेना कानूनगों राम प्रकाश मिश्रा बेनीगंज कोतवाल केन्द्र पर पहुंच कर पूरे मामले की जांच पड़ताल की वहीं जिल प्रोबेशन अधिकारी की तहरीर पर संचालक मोहम्मद रजी व अधीक्षका आरती के खिलाफ जालसाजी कूट रचित ढंग से धन हड़पने आदि के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस टीम ने स्वाधार गृह की अधीक्षिका आरती को गिरफ्तार कर लिया। हालाँकि संस्था संचालक अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।एसपी विपिन कुमार मिश्रा ने बताया की संस्था संचालक की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगायी गयी है और शीघ्र ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
       बताते चलें कि स्वाधार केन्द्र से ही एक हेल्पलाइन भी संचालित होती थी। लोगों के मुताबिक ये हेल्पलाइन काफी दिनों से बंद कर दी गई है। वहीं जिम्मेदार भी इस हेल्पलाइन को लेकर जांच शुरू कर दी है। कि इस हेल्प लाइन के माध्यम से कितने लोग जुडे़ थे कितने लोगों को इस लाइन के माध्यम से कितने लोगों की मदद की गई है। इस सब बातों पर जांच शुरू कर दी गई है। बेनीगंज में स्थित स्वाधार केन्द्र की क्षमता 30 महिलाओं की रूकने की है। जिनके खाने पीने और रहने की सारी व्यवस्थाएं होने का कागजों पर दावा किया गया है। जबकि वहीं लोगों केे मुताबिक यहां पर सिर्फ दो चार महिलाएं ही कभी कभार दिखाई देती थी। बेनीगंज स्वाधार केन्द्र में संचालक मोहम्मद रजी व अधीक्षिका आरती सहायक नीरू तिवारी संस्था में कार्य करती हैं। लोगों की माने तो इस केन्द्र पर इनके अलावा जब भी कोई जांच आती थी तक कुछ महिलाओं को बाहर से बुला लिया जाता था।
             जांच संडीला तहसीलदार पंकज सक्सेना ने जब की तो पूछताछ की तो उसमें बताया गया कि आठ महिलाओं को पुर्नवास हो चुका है। वहीं कुछ महिलाओं को बुलाकर उनके बयान भी दर्ज कराएं गए हैं। जिसे लेकर लोगों में चर्चा है कि उन्हें जांच में खुद को बचाने के लिए घरों से बुला लिया गया है। वहीं एक महिला ने इस हकीकत को बयां किया है।संडीला तहसीलदार पंकज सक्सेना ने करीब चार घंटे से अधिक बैठकर सभी के बयान दर्ज किए।लोगों में चर्चा है कि स्वाधार केन्द्र पर प्रत्येक वर्ष करीब 14 लाख से 16 लाख तक का अनुदान आता रहता है। वहीं लोगों के मुताबिक बेनीगंज में यह केन्द्र करीब दस वर्षो से चल रहा है। इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह से धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला किया जा रहा था। जब स्वाधार केन्द्र पर जांच शुरू हुई तो जांच से पहले मौके पर बुलाई गई राधा व मुन्नी से सहायक पद पर तैनात नीरू पर आरोप लगाया कि आज उन्हें घर से बुलाकर लाई हैं। इस बात से यह खुलासा हुआ कि जब भी कोई जांच होती होगी तो महिलाओं को घर से बुला लिया जाता था। मंगलवार को जांच शुरु हुई तो यह मामला समाने आया कि जो महिलाओं केन्द्र पर बुलाया गया था। वह सौ रुपए के प्रलोभन  देकर थोड़ी देर  के लिए बुलाया गया। यह बात जांच में खुलकर सामने आई।