परम्परा और परिवर्तन का संगम
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– गाँव के मध्य स्थित वह विशाल वटवृक्ष अब केवल छाया का स्थान नहीं रहा था; वह सामूहिक चेतना का केन्द्र बन चुका था। उसकी जटाओं की भाँति गाँव के लोगों के […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– गाँव के मध्य स्थित वह विशाल वटवृक्ष अब केवल छाया का स्थान नहीं रहा था; वह सामूहिक चेतना का केन्द्र बन चुका था। उसकी जटाओं की भाँति गाँव के लोगों के […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ परिवर्तन, प्रकृति का शाश्वत नियम और जीवन का अपरिहार्य सत्य है। यह केवल एक दार्शनिक विचार नहीं, बल्कि हर चर और अचर वस्तु पर लागू होने वाला प्राकृतिक नियम है। […]