शिवत्व की यात्रा का अगला चरण : मौन-तप और वाणी की शुद्धि
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– श्रावण का अन्तिम सप्ताह बीत चुका था। आश्रम का वातावरण अब अधिक शांत था। वर्षा की रिमझिम ध्वनि, वृक्षों से टपकती जल-बूँदें और दूर बहती नदी का मधुर स्वर—सब मिलकर एक […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– श्रावण का अन्तिम सप्ताह बीत चुका था। आश्रम का वातावरण अब अधिक शांत था। वर्षा की रिमझिम ध्वनि, वृक्षों से टपकती जल-बूँदें और दूर बहती नदी का मधुर स्वर—सब मिलकर एक […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– गाँव के मध्य स्थित वह विशाल वटवृक्ष अब केवल छाया का स्थान नहीं रहा था; वह सामूहिक चेतना का केन्द्र बन चुका था। उसकी जटाओं की भाँति गाँव के लोगों के […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शिव न किसी एक रूप, मूर्ति या कल्पना तक सीमित हैं। शिव तत्त्व हैं—अविनाशी, अव्यक्त और सर्वव्यापक।वेद उद्घोष करते हैं— “एको देवः सर्वभूतेषु गूढःसर्वव्यापी सर्वभूतान्तरात्मा।”(श्वेताश्वतर उपनिषद् 6.11) शिव वही एक देव […]
राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी राघव–हर पापी को कृत दुष्कर्मो का दण्ड भुगतना होता है।कलुषित विचार रखने वाले को सौ मौतें मरना होता है।शिव ही निर्णय करने वाले शिव ही दण्ड विधाता हैं।शान्ति हेतु इस दुनिया मे […]
पटना:- “गूंज कलम की” राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था, पटना (बिहार) के मुख्य मंच के व्हाट्स एप समूह पर 31 जुलाई 2022 को रात्रि 9 बजे से 10 बजे तक आशु लेखन काव्य प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। […]