मनोहरा देवी ने सूर्यकान्त त्रिपाठी को ‘निराला’ बनाया था

February 20, 2026 0

निराला के जन्म-दिनांक (२१ फ़रवरी) पर विशेष प्रस्तुति ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• इलाहाबाद का नाम आते ही प्रथम पंक्ति मे जिस साहित्यिक अक्खड़ हस्ताक्षर का नाम-रूप दिखता है, वह सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ का है। […]

पं० हेरम्ब मिश्र-स्मृति शिखर-सम्मान– २०२५ की हुई घोषणा

December 3, 2025 0

प्रयागराज। ‘पं० हेरम्ब मिश्र-स्मृति पत्रकारिता-संस्थान’, प्रयागराज की ओर से मूर्द्धन्य पत्रकार-लेखक पं० हेरम्ब मिश्र की स्मृति मे उनकी पुण्यतिथि १७ दिसम्बर के अवसर पर प्रतिवर्ष पत्रकारिता/मीडिया, साहित्य एवं युवा-पत्रकारिता के क्षेत्रोँ मे दिये जानेवाले शिखर-सम्मानो […]

‘कामायनी’ की काव्य-कमनीयता

June 13, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• वस्तुत: आज न तो ‘कामायनी’-सदृश कृती (निष्णात/निपुण) कृतिकार हैँ और न ही अनुभव करनेवाला पाठक-वर्ग है; क्योँकि कविता के नाम पर ‘हृदयजीविता’ की अवहेलना करते हुए, ‘विचारजीविता’ का पालन-पोषण किया […]

लेखक-प्रकाशक सारस्वत सृष्टि का सर्जक होता है

December 31, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय पुस्तकें ‘जीवन से मरण तक’ का आख्यान करती आ रही हैं। शब्द कभी अभिधा, कभी व्यंजना तो कभी लक्षणा के अदृश्य परिधान धारणकर पाठक-पाठिकावर्ग को गुदगुदाते आ रहे हैं; ज्ञानसिन्धु […]

प्रकाशक आलोक चतुर्वेदी का निधन

October 11, 2022 0

साहित्य संगम, प्रयागराज के प्रकाशक ६० वर्षीय आलोक चतुर्वेदी का १० अक्तूबर को निधन हो गया। वे लीवर-रोग की समस्या से जूझ रहे थे। उन्हें उनके स्वजन दिल्ली उपचार के लिए ले गये थे, जहाँ […]

डॉ० घनश्याम भारती : एक निष्णात सारस्वत हस्ताक्षर

July 31, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाध पाण्डेय प्रियवर डॉ० घनश्याम भारती जी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गढ़ाकोटा, सागर (मध्यप्रदेश) मे हिन्दीविभागाध्यक्ष और राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय सारस्वत आयोजनों के सूत्रधार हैं। वे मेरे परम प्रिय शिष्य हैं और अध्ययन-अनुशीलन के प्रति […]

जीवन मायावी नहीं होता, पर रिश्ते मायावी हो जाते हैं

July 25, 2022 0

पटना:- “गूँज कलम की” राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था,पटना (बिहार) के मुख्य मंच पर ऑनलाईन आशु लेखन काव्य प्रतियोगिता दिनांक 24/07/2022 को रात्रि 9बजे से 10 बजे तक सम्पन्न हुई। मुख्य संचालिका सुशी सक्सेना ने इंदौर, मप्र […]

फेस्टिवल ऑफ लैटर्स, साहित्‍योत्‍सव आज से नई दिल्‍ली में हुआ शुरू

March 10, 2022 0

भारत का संयुक्‍त साहित्य उत्सव, साहित्‍य अकादमी का फेस्टिवल ऑफ लैटर्स, साहित्‍योत्‍सव आज नई दिल्‍ली में शुरू हुआ। फेस्टिवल ऑफ लेटर्स 2022 भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह के एक […]

इहे ह भोजपुरी बाबू!

January 27, 2022 0

ई हमरा भोजपुरी उपनियास के पहिलका हिसवा के एगो छोटी चुकी अंसवा ह। तिरछोल भौजी — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय “का हो भौजी! घुघुनिया भछत-भछत सेकराहे-सेकराहे फेकरात-फेकरात तिरिछियाइ के मटकी मारत तीरछी पाला कइले केने […]

माता श्री सम्मान से सम्मानित हुए डॉ० राजीव डोगरा

September 30, 2021 0

कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश : कांगड़ा में आयोजित कार्यक्रम एक शाम मां के नाम में डॉ राजीव डोगरा को माता श्री सम्मान देकर सम्मानित किया गया। उनको यह सम्मान मगसम संस्थान के दिल्ली से आए मंच […]

बालकृष्ण भट्ट हिन्दी-साहित्य के प्रथम व्यावहारिक आलोचक थे— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ

July 20, 2021 0

स्वनामधन्य निबन्धकार और पत्रकार पं० बालकृष्ण भट्ट इलाहाबाद में जन्मे, पले, बढ़े तथा अन्तिम श्वास भी यहीं लिया। तब तक वे साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्रों में अपना महत् प्रभाव स्थापित कर चुके थे। भाषाविज्ञानी […]

हिंददेश की विश्व बंधुत्व इकाई का “रिमझिम बारिश” सा आगाज, कार्यक्रम में खूब झूमे दर्शक

July 6, 2021 0

राजेश पुरोहित : दोहा, कतर:- कई दिनों की कठिन परिश्रम के बाद एक अनोखे अंदाज में हिंददेश विश्व बन्धुत्व की अध्यक्षा निकिता कुसुम तिवारी के द्वारा इस कार्यक्रम को बड़े प्यार और मोहक ढंग से […]

साहित्य संगम संस्थान के चार दिवसीय स्थापना दिवस समारोह ने प्राप्त की पूर्णता

July 5, 2021 0

राजेश पुरोहित, भवानीमंडी दिल्ली- साहित्य संगम संस्थान नई दिल्ली स्वर्णिम स्थापना दिवस पांच जुलाई की भव्यता हेतु आयोजित चार दिवसीय कार्यक्रम का समापन वास्तव में ऐतिहासिक रहा। संस्थान के पंचम स्थापना दिवस के चतुर्थ दिवस […]

इति सिद्धम्– साहित्य समाज को दर्पण थमाता हुआ

October 7, 2019 0

प्रसंगवश———- डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- बचपन (८-१०वर्ष) में देखता था कि आये-दिन कोई व्यक्ति द्वार पर याचक की मुद्रा में आ खड़ा होता था। उस व्यक्ति के कन्धे पर ‘पगहा’, गाय-बछिया को बाँधनेवाली डोर लटकी रहती […]