लेबनान की राजधानी बेरूत में भयंकर विस्फोट!
‘मुक्त मीडिया’ का ‘आज’ का सम्पादकीय — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ५ अगस्त की तारीख़ में लेबनान की राजधानी बेरूत में विस्फोटक पदार्थ का भयावह प्रभाव दिख रहा है। विस्फोट कैसे हुआ? जितने मुँह-उतनी बातें। […]
‘मुक्त मीडिया’ का ‘आज’ का सम्पादकीय — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ५ अगस्त की तारीख़ में लेबनान की राजधानी बेरूत में विस्फोटक पदार्थ का भयावह प्रभाव दिख रहा है। विस्फोट कैसे हुआ? जितने मुँह-उतनी बातें। […]
— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय साम्प्रतिक काल विघटन और संक्रमण का है, जो काल का चक्रीय अनुशासन है। ऐसी स्थिति में, संघटन, सह-अस्तित्व तथा सदाशयता की भावना और सद्इच्छा के साथ प्रबल जिजीविषा (जीने की […]
‘मुक्त मीडिया’ का ‘आज’ का सम्पादकीय पृथ्वीनाथ पाण्डेय– आज हमारी देवनागरी लिपि और हिन्दीभाषा अपने मौलिक अभिज्ञान (परिचय/पहचान) से सुदूर होती जा रही हैं, जिसके प्रति किसी को चिन्ता तक नहीं। सच तो यह है […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- सच तो यह है कि तथाकथित धर्मानुरागी ‘प्रार्थना’ का वास्तविक अर्थ जानते ही नहीं। मनुष्य जैसे ही आत्म-केन्द्रित अथवा परिवार-केन्द्रित अभिलाषा और आकांक्षा की पूर्ति के लिए हाथ जोड़ता है, उसकी प्रार्थना […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- आज सम्पूर्ण देश में ‘महँगाई’ बुरी तरह से अपने पैर फैला चुकी है; अफ़सोस! इस विषय पर देश की सरकार ‘दिव्यांग’ सिद्ध हो चुकी है। वह किंकर्त्तव्यविमूढ़ बन चुकी है, इसीलिए वह […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय– केन्द्र-राज्य की सरकारों ने देश की जनता की गाढ़ी कमाई को बेहयाई के बेसन में लपेटकर पकौड़ीनुमा निर्दय अर्थव्यवस्था की कूटनीतिभरी बर्बरता की दहकती कड़ाही में तलकर चट करने की नीतियाँ बनाती […]
भाषाकार फादर कामिल बुल्के की आज (1 सितम्बर) जन्मतिथि है। डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (भाषाविद्-समीक्षक) ‘कामिल’ का अर्थ है, एक प्रकार का पुष्प’। जायसी ने ‘पद्मावत’ में क्या ख़ूब कहा है, “फूल मरै पर न मरै […]
राजेश कुमार शर्मा “पुरोहित” कवि, साहित्यकार धोरों की धरती राजस्थान के जैसलमेर में जन्में हरीश सुथार आगे चलकर क्वीन हरीश के नाम से प्रसिद्ध हुए। हरीश का बचपन बहुत अभावों में व्यतीत हुआ। इनके घर […]
राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’, शिक्षक/साहित्यकारभवानीमंडी, जिला झालावाड़, राजस्थान बाह्य व आंतरिक दोनों तत्वों का समावेश व्यक्तित्व में होता है। मार्टन प्रिंस ने कहा था कि व्यक्तित्व व्यक्ति की समस्त जैविक जन्मजात विन्यास उद्देग रुझान क्षुधाएँ […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इस देश में जितने भी लोग ‘हिन्दू’ की दूकानें खोल-खोलकर बैठे हुए हैं, उनमें से पाँच प्रतिशत भी ऐसे नहीं हैं, जो दस वाक्यों […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आज जिधर देखिए उधर, ‘पलायनवादी आक्रोश’। चेहरे निस्तेज; हथेलियों की आग बुझी हुई। दिखती है तो पिछवाड़े में बाँस डालकर ख़ुद को सबसे अधिक ऊँचाई पर खड़े रहने की थोथी ख़्वाहिश। यही […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय जो लोग यह मानते हैं कि “वन्दे मातरम्” गाने से वे ‘काफ़िर’ की श्रेणी में आ जायेंगे, उनकी यह मान्यता पूर्णत: स्वनिर्मित, स्वपोषित, असन्तुलित तथा एकपक्षीय मानसिकता की परिचायिका है; कारण कि […]
‘साहित्यांजलि प्रज्योदि’ की ओर से २ अगस्त, २०१८ ईसवी को कटरा, इलाहाबाद में तीन चरणों में एक सारस्वत समारोह आयोजित किया गया था। समारोह का उद्घाटन दीपप्रज्वलन कर किया गया था, तत्पश्चात् रसराज अवनेन्द्र पाण्डेय […]
नगर की बौद्धिक, शैक्षिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक संस्था ‘सर्जनपीठ’ की ओर से कुशल वक्ता, सन्त राजनेता तथा विदेह-जैसे वीतरागी महामानव राजर्षि पुरुषोत्तम दास टण्डन की जन्मतिथि का आयोजन आज (१ अगस्त, २०१८ ईसवी) कीडगंज में किया […]
– डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आपकी लेखनी यदि ‘पराधीनता’ की ओर बढ़ने के लिए मचल रही हो तो उसे पहले दुलराइए-पुचकारिए- समझाइए; उसके बाद भी उस धृष्ट की अक्खड़पना दूर न हो तो झट उस लेखनी […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इन दिनों ‘उन्मादी भीड़’ (मॉब लिचिंग) शब्द अपनी पूरी आक्रामकता के साथ सभी के होठों पर उत्सुकता और चिन्तापूर्वक बैठ चुका है। हमारी व्यवस्थापिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका तथा अवैध चतुर्थ स्तम्भ ‘मीडियापालिका’ पूर्णत: […]
‘डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला’ अस्पष्ट भाषा/अपभ्रंश भाषा ‘म्लेच्छ-भाषा’ है। जिन वर्णों का उच्चारण व्यक्त न हो, वह ‘म्लेच्छ-भाषा’ कहलाती है। किरात, खस, बर्बर, पह्लव, पौण्ड्र, द्रविड, शक, शबर, सिंहल, यवन इत्यादिक जातियाँ-जनजातियाँ-बर्बर जातियाँ ‘म्लेच्छ’ […]
डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’- आधुनिक समाज में पुरुष आज भी सर्वोपरि है परन्तु हम यह नहीं भूल सकते कि एक महिला का जीवन मनुष्य के जीवन से कहीं अधिक जटिल है। एक महिला को अपनी […]
आकांक्षा मिश्रा, गोंडा, उत्तर प्रदेश- मकर संक्रांति की तैयारी दादी पूरी शिद्दत से करती थी इस पर्व के पूर्व ही तिवारी जी को नेवता देती उनके लिए धोती, कुर्ता, गमछा, इक्कीस रूपये धोती के छोर […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- यहाँ पर दो शब्द हैं : ‘बीभत्स’ और ‘वीभत्स’। ‘मुक्त मीडिया’ की एक मित्र हैं, ‘सुधा मिश्र द्विवेदी जी’। सुधा जी रेलविभाग में ‘राजभाषा-अधिकारी’ हैं; कई भाषाओं की ज्ञाता हैं तथा ‘गोल्ड […]
राघवेन्द्र कुमार ”राघव”- प्राचीन धर्म ग्रन्थ कहते है ” जो धारण करने योग्य हो ” वह धर्म है | लेकिन आज के परिप्रेक्ष्य में धर्म आडम्बर से ज्यादा कुछ नहीं | हम किसी भी धर्म की […]
महेन्द्र नाथ महर्षि (से. नि. अ. दूरदर्शन दिल्ली)- नृत्य क्या है ? क्यों किया जाता है ? इसका जबाब अगर परिभाषा और परंपरा में लपेट कर देने की कोशिश की जाए तो मुश्किल है। सरल […]