धर्म सड़क पर आ गया, मर्यादा भी भंग

January 18, 2025 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–महाकुम्भ के पर्व पर, भाँति-भाँति के लोग।कहते ख़ुद को साधु हैँ, सांसारिक है भोग।।दो–भौतिकता मे लिप्त हैँ, भस्म लगाये वेश।कान्ति अलक्षित दिख रही, कहे कहानी केश।।तीन–धर्म सड़क पर आ गया, […]

पारमार्थिक भावना, समय का सदुपयोग और औदार्य: समाज के उत्थान की सच्ची संपदा

November 25, 2024 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’– मनुष्य के जीवन में अनेक गुण और मूल्य होते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ऐसे हैं जो उसे सच्चे अर्थों में महान और समाज के लिए उपयोगी बनाते हैं। इनमें पारमार्थिक […]

जीवन की सार्थकता और विचारशीलता : एक विश्लेषण

November 24, 2024 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’— जीवन की सार्थकता का प्रश्न हर व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है। हम सभी अपने जीवन को उद्देश्यपूर्ण और उपयोगी बनाने की आकांक्षा रखते हैं। इस दिशा में विचारशीलता का महत्व सर्वोपरि […]

Mind Is A Double-Edged Sword

August 28, 2024 0

Raghavendra Kumar Raghav– The mind, often hailed as the fastest entity, can be both our greatest ally and our most formidable foe. Its swiftness can lead us to the divine nectar of the Supreme Being, […]

Dharma

November 11, 2023 0

Aditya Tripathi (Assistant Teacher, Hardoi/Managing Editor) Once upon a time in a serene village nestled amidst rolling hills, a remarkable phenomenon unfolded, where the protectors of religion experienced an extraordinary bond with the faith they […]

नास्ति सत्य समं तपः

May 12, 2023 0

नास्ति विद्या समं चक्षु नास्ति सत्य समं तपः। नास्ति राग समं दुःखं नास्ति त्याग समं सुखम्॥ विद्या के समान कोई दृष्टि नहीं है। सत्य से बढ़कर कोई तप नहीं है। राग या आसक्ति से बड़ा […]

आरम्भो न्याययुक्तो य: स हि धर्म इति स्मृत:

February 16, 2023 0

“आरम्भो न्याययुक्तो यः स हि धर्म इति स्मृतः।” यानि न्याय से युक्त होने पर ही धर्म का प्रारम्भ होता है यही बात याद रखने योग्य है। अब उपरोक्तानुसार आप विचार कीजिये क्या वर्तमान किसी भी […]

धर्म और अधर्म के प्रेरणाप्रद संवाद से सीखें

January 20, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अधर्म ने धर्म से कहा, “धर्म भाई! मृत्युलोक मे ऐसा एक भी व्यक्ति नहीं दिखता, जो तुम्हारे तात्त्विक रहस्य को जान सके; इसका कारण क्या है?” धर्म ने सारगर्भित उत्तर […]

‘भक्त’ अपने ‘भगवान्’ की बात क्यों नहीं मानते?

July 20, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कैसी विडम्बना है कि पहली ओर, हमारे धर्माचार्य अपने वचनामृत के अन्तर्गत ‘धर्म’ की परिभाषा करते हैं, “धारयते इति धर्म:।” अर्थात् जो धारण किया जाता है, वह ‘धर्म’ है। मनुष्य […]

शतरुद्रिय पाठ की महिमा

February 15, 2021 0

सङ्कलित : शतरुद्रिय रुद्राष्टाध्यायीका मुख्य भाग है। शतरुद्रियका माहात्म्य रुद्राष्टाध्यायीका ही माहात्म्य है। मुख्यरूपसे रुद्राष्टाध्यायीका पञ्चम अध्याय शतरुद्रिय कहलाता है। इसमें भगवान् रुद्रके शताधिक नामोंद्वारा उन्हें नमस्कार किया गया है। ‘शतं रुद्रा देवता अस्येति शतरुद्रीयमुच्यते […]

धूमधाम व श्रद्धा से मनाया गया करवाचौथ पर्व

November 4, 2020 0

मंझनपुर, कौशाम्बी : कौशाम्बी में करवा चौथ त्योहार धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर सुहागिनों ने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखा और पति की सुख समृद्धि की कामना की। इस दौरान […]

सादगी पूर्ण ढंग से भक्तों ने माता रानी का किया मूर्ति विसर्जन

October 26, 2020 0

मंझनपुर, कौशाम्बी : ग्राम पंचायत कुम्हियावां में आज नहर में मूर्तियों का विसर्जन किया गया। वहीं ग्राम सभा सरसवा, टेवां,अजरौली, लौगावा सहित आस पास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी सादगी पूर्ण तरीके से मूर्ति विसर्जन […]

Manusmriti : It is your choice that what you adopt?

May 13, 2020 0

Raghavendra Kumar Tripathi ‘Raghav’– Scholars Of Hinduism point to the inconsistencies and have questioned the authenticity of verses, and the extent to which verses were changed, inserted or interpolated into the original, at a later […]

परशुराम जयंती विशेष : शस्त्र विद्या के महान गुरु भगवान परशुराम

April 24, 2020 0

पितामह भृगु द्वारा सम्पन्न नामकरण संस्कार के अंतर्गत राम जमदाग्नि का पुत्र होने के कारण जामदग्न्य और शिव द्वारा प्रदत्त परशु धारण किये रहने के कारण वे परशुराम नाम से प्रसिद्ध हुए। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा […]

इस समाज की नीवँ धर्म है

January 8, 2020 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ हिंसक पशु कब समझा है, कोमल मन के भाव मधुर । बिना दण्ड कब सुधरे हैं, वामी, कामी और दुष्ट असुर । इस समाज की नीवँ धर्म है, यह हर प्राणी […]

“अथ से इति” के मर्म को धारण करें

May 19, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मुझे आप समस्त अध्यवसायी शिष्या-शिष्यवृन्द और प्रबुद्ध मित्रमण्डल पर गर्व है, जिनमें प्रबल जिजीविषा (जीने की इच्छा) है और जिगीषा (जीतने की इच्छा) भी। आप अपनी इस विजयिनी शक्ति को कहीं से […]

देश के राजनेतागण! धर्म की ‘अफ़ीम’ मत बाँटिए

February 15, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय देश की जनता को ‘हिन्दू-हिन्दुत्व’ और ‘मुसलमान-मुसलमानत्व’ का खेल मत दिखाइए; पहले स्वयं एक ‘मनुष्य’ बनिए, फिर अपने-अपने तरीक़े से भारत राष्ट्र को सुधारने का दावा कीजिए। यदि राष्ट्रहित में कुछ करने […]