“हम जीवनमूल्योँ को भूलते गये; अब तो कोई जीवन-मूल्य है ही नहीँ”– महादेवी वर्मा
“आपने जब काव्यक्षेत्र मे प्रवेश किया था तब उस समय का साहित्यिक परिवेश कैसा था?” “कहाँ से शुरू करूँ? अच्छा कुछ सोचने दीजिए। अतीव सम्भावनाओँ से विकसित था, उस समय का साहित्यिक परिवेश। १९१७ मे […]