सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भले ही एंटी भू माफिया टास्क फोर्स का गठन कर दिया हो पर जिम्मेदारों की मनमानी के चलते सरकारी जमीने खुलेआम कब्जाई जा रही हैं। एंटी भू माफिया टास्क फोर्स बेअसर साबित हो रही है। यही वजह है कि लाख शिकायत करने के बावजूद भी सरकारी जमीनों से कब्जा नहीं हटाया जा सका।
मामला संडीला तहसील क्षेत्र के परगना कल्यानमल के अंतर्गत दोबरा गांव का है। गांव निवासी अजय कुमार शुक्ला पुत्र वासुदेव शुक्ला ने उच्चाधिकारियों को प्रेषित शिकायती पत्र में कहा है कि उनके गांव में आबादी की भूमि गाटा संख्या 46 रकबा 0. 320 हेक्टेयर पर गांव के विद्याधर मिश्र व उनके पुत्र मनोज मिश्र, सुधीर मिश्र, व पुनीत मिश्रा ने अवैध निर्माण कर लिया है। ग्राम प्रधान के संरक्षण में दबंगों ने आबादी की जमीन पर मकान बना लिए जबकि उनके पुराने मकान भी पहले से मौजूद हैं। मामले की शुरूआत से ही शिकायत की गई पर जब तक मकान बनते रहे तब तक किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं हुई। बीते 11 मई को शिकायत की जांच करने पहुंचे लेखपाल सुनील कुमार वर्मा ने फर्जी आख्या लगा दी जिसमें दर्शा दिया कि उक्त भूमि पर कब्जा तो है पर निर्माण के नाम पर सिर्फ नींव भरी गई है जबकि कोई मकान नहीं बना है, इसके लिए विपक्षियों को अवगत करा दिया गया है कि आवंटन के पश्चात ही भूमि का उपयोग करें।
हालांकि लेखपाल की आख्या से स्पष्ट है कि आबादी की भूमि पर दबंगों का कब्जा है, पर मकान को नजरअंदाज करना लेखपाल की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है। पीड़ित का यह भी आरोप है कि ग्राम प्रधान, लेखपाल व कानूनगो ने मिलकर उक्त दबंगों को आबादी की जमीन अवैध रूप से सौंप दी। जबकि आबादी की जमीन का व्यक्तिगत प्रयोग करना गैरकानूनी है। दबंगों ने अपने मकान तक बना लिए पर उन पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। ऐसे में योगी सरकार द्वारा गठित एंटी भू माफिया टास्क फोर्स पर भी सवाल उठना लाजमी है।