★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
धौलपुर (राजस्थान) में एक महिला के साथ १५ मार्च को उसके पति और बच्चों के सामने सामूहिक दुष्कर्म किया गया था, ऐसा पीड़िता ने कथन किया है। इतना ही नहीं, आरोपितों ने पीड़िता के पति को बुरी तरह से मारा-पीटा है। अब वे सभी आरोपित भाग खड़े हुए हैं। इस प्रकरण पर अभी तक काँग्रेस-द्वारा गठित गहलौत-सरकार मौन है। प्रश्न है, “लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ” का नारा देनेवाली प्रियंका गांधी कहाँ छिपी हुई है? वे उत्तरप्रदेश मे पीड़िताओं के आँसू पोछने के लिए जा सकती हैं और जब कथित काँग्रेसी सरकार मे घृणित घटना घटी हो तब उनका अभी तक मौन रह जाना, किस चरित्र का परिचायक है? राहुल गांधी किस बिल मे घुसे हुए हैं? अन्य काँग्रेसी नेता चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? कथित गांधी-परिवार को धिक्कार है!
दूसरी ओर, उस क्षेत्र के काँग्रेसी विधायक ने आपसी रंजिश का आरोप लगाते हुए, उक्त प्रकार की घटना न होने की बात कही है।
प्राथमिकी दर्ज़ कर ली गयी है; परन्तु छ: दिन बीत चुके हैं, अभी तक वहाँ की पुलिस आरोपितों को पकड़ नहीं सकी है, बल्कि ऐसा समझा जाना चाहिए कि धौलपुर-पुलिस आरोपितों को गिरिफ़्तार ही नहीं करना चाहती है।
इससे इंकार नहीं किया जा सकता है कि राजस्थान का मुख्यमन्त्री अशोक गहलौत संवेदनहीन सिद्ध हो चुके हैं। एक अनुभवी नेता होने के बावुजूद वे अब दिलो दिमाग़ से बूढ़े हो चुके हैं। काँग्रेस के प्रमुख नेताओं को चाहिए कि गहलौत की विदाई कर, किसी युवा कार्यकर्त्ता को मुख्यमन्त्रि-पद का दायित्व सौंपें।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २० मार्च, २०२२ ईसवी।)