गत रविवार को उत्तरप्रदेश लोक सेवा आयोग-द्वारा आयोजित समीक्षा-अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी के सामान्य हिन्दीवाले खण्ड मे कई प्रकार की शब्दप्रयोग-अशुद्धि, ग़लत उत्तर-विकल्प तथा व्याकरण की अन्य ग़लतियाँ की गयी हैँ। यह दावा व्याकरणवेत्ता और भाषाविज्ञानी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने किया है। स्मरणीय है कि प्राय: प्रत्येक प्रतियोगितात्मक परीक्षा की सामान्य हिन्दी के प्रश्नपत्र वा खण्ड मे आपत्तिजनक उत्तर-विकल्प की ओर ध्यान आकृष्ट करनेवाले आचार्य ने बताया है कि सामान्य हिन्दी (भाग दो) के प्राश्निक (प्रश्नपत्र तैयार करनेवाला) को हिन्दी-व्याकरण का बोध नहीँ है।
आचार्य ने कोड 'UNHSIV– 01' और प्रश्नपुस्तिका बार कोड-संख्या 7464647 वाले प्रश्नपत्र मे समान्य हिन्दी के दिये गये प्रश्नो का परीक्षण करते हुए बताया है कि 144वेँ प्रश्न मे 'बाह्य' और 'ग्राह्य' का विलोम पूछा गया है, जिनमे से (b) (c) और (d) तो है ही नहीँ। (a) मे 'अभ्यन्तर' और 'त्याज्य' दिख रहा है, जोकि ग़लत उत्तर-विकल्प है; क्योँकि 'बाह्य' और 'ग्राह्य' का 'अन्त:' और 'त्याज्य' होगा। यदि 'बाह्यन्तर' होता तो 'अभ्यन्तर' को सही माना जाता। 151वेँ प्रश्न मे 'सूर्य' का कौन-सा पर्यायवाची नहीँ है, इसे पूछा गया है, जबकि इस उत्तर-विकल्प मे सूर्य के तीन पर्यायवाची शब्दोँ के स्थान पर दो ही दिये गये हैँ; क्योँकि 'मार्तण्ड' का अर्थ सूर्य नहीँ होता; शुद्ध शब्द 'मार्त्तण्ड' है, इसलिए वर्तनीदोष के कारण यह प्रश्न ही ग़लत है।
159वेँ प्रश्न मे चारोँ विकल्प के सभी शब्दोँ की वर्तनी अशुद्ध हैँ। यदि (d) को शुद्ध माना जाता है तो वह भी ग़लत है; क्योँकि शुद्ध शब्द 'चरमोत्कर्ष' (चरम+उत्कर्ष = चरमोत्कर्ष) होता है, न कि 'चर्मोत्कर्ष', जैसा कि प्रश्नपत्र मे दिख रहा है। 192वेँ प्रश्न मे 'सूची एक' को 'सूची दो' से सुमेलित करते हुए, कूट का प्रयोग कर, उत्तर चुनने के लिए कहा गया है। इस प्रश्न का उत्तर-विकल्प (a) ही ग़लत है; क्योँकि 'उदार' शब्द का विलोम 'अनुदार' होता है, जबकि प्रश्नपत्र मे 'कृपण' दिया गया है। यदि 'दाता' होता तो 'कृपण' सही माना जाता।
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने उत्तरप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा-नीति के प्रति क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि इस परीक्षा के 38 प्रश्नात्मक वाक्य अशुद्ध हैँ; क्योँकि इन प्रश्नो मे प्रश्न-विकल्प के रूप मे विवरण है, इसलिए इनमे ‘उप-विरामचिह्न’ (:) के स्थान पर ‘विवरण-चिह्न’ (:–) का प्रयोग होगा। (:) इस चिह्न का प्रयोग होता है :– साहित्य : एक परिशीलन, उत्तरप्रदेश समीक्षा-अधिकारी-परीक्षा : प्रश्नो के घेरे मे इत्यादिक। इसप्रकार 141 से 146, 149 से 152, 155 से 158, 162 से 163, 167 से 169, 171 से 175 और 179 तक के सारे प्रश्नात्मक वाक्य अशुद्ध हैँ। यदि यही अशुद्धि परीक्षार्थी करते तो उन्हेँ अंकरहित कर दिया जाता।
उपर्युक्त परीक्षा की सामान्य हिन्दी के प्रश्नो का गम्भीरतापूर्वक परीक्षण करनेवाले व्याकरणवेत्ता और भाषाविज्ञानी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने उत्तरप्रदेश-शासन से माँग की है कि वह उपर्युक्त अशुद्ध और अनुपयुक्त प्रश्नो को हटवाने के लिए उत्तरप्रदेश-लोक सेवा आयोग के शीर्ष अधिकारी के पास एक आदेशपत्र सम्प्रेषित करे, जिससे कि समय रहते परीक्षार्थियोँ के साथ न्याय हो।