इस साल ठण्ड अगर कम है, तो उसका सीधा सम्बन्ध उत्तर प्रदेश सरकार से है

राज चौहान 


समूचे उत्तर प्रदेश में लगभग 8 लाख से ऊपर सरकारी स्कूल हैं, और इनमें पढ़ने बाले बच्चों को पढाई से लेकर खाना और कपड़े मुहैया कराना भी राज्य सरकार की जिम्मेदारियों के अंतर्गत ही आता है।

लोग कहते हैं टीचर नहीं पढ़ाते सरकारी स्कूलों में, बच्चों को उच्च गुणवत्ता का भोजन मुहैया नहीं कराते, चलिए मान लेते हैं, लेकिन सवाल जब राज्य सरकार की जिम्मेदारियों में लापरवाही का आने लगे तब क्या कहेंगे आप की सरकार ही लापरवाह हो चली है?

मौजूदा वक्त में हालात तो कुछ ऐसी ही हो चले हैं,
दिसम्बर आधा बीत चुका है, ठण्ड ने अपनी भरपूर दस्तक भी दे डाली लेकिन सरकार को लगता ठण्ड जून और मई के महीनों में आती है, यह तो गर्मी का मौसम है।

समूचे प्रदेश में 8 लाख से ऊपर सरकारी स्कूल हैं, जिसमे डेढ़ करोड़ से भी ऊपर बच्चे शिक्षा पा रहे हैं, हर साल सरकारें दिसम्बर तक बच्चों को ठण्ड से बचने के लिए गर्म कपड़े स्वेटर, मोजे, आदि प्राप्त करवा देती है, परंतु मौजूदा सरकार में अभी टेंडर ही नहीं पड़ा।

टेंडर दिसम्बर के आख़िर में पड़ेगा फिर पास होगा । इसमें वक्त लगेगा । इतना ही नहीं फिर होगा आदेश और उसके बाद नाप और फिर तैयार होंगे गर्म कपडे तब तक ठण्ड बिदा हो चुकी होगी मतलब इस वर्ष बच्चों को गर्मियों में गर्म कपड़े सरकार मुहैया करा पाएगी। तो ऐसे में सवाल ये उठता है कि जवाब देगा कौन, और इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा ?
सवाल आज भी बहुतेरे हैं पर जवाब शायद ही मिले । यदि जवाब की चिन्ता होती तो बच्चे ठण्ड से ठिठुर नहीं रहे होते।

अगर जिम्मेदारी शिक्षा की हैं, तो सुरक्षा की भी होनी चाहिए।