हरदोई- स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत पात्रों को दिलाए गए शौचालय ग्राम प्रधानों की जेबों में पड़े हुए हैं। शौचालय निर्मित न होने ने ग्रामवासी खेतों का सहारा ले रहे हैं। लेकिन ग्राम प्रधान की ओर से सामग्री मंगाने के नाम पर रूपए लेकर ग्रामीणों की दूसरी किश्त अटकाई जा रही है। आए दिन इस प्रकार की समस्याएं सामने आ रही हैं।
मामला ब्लॉक टडि़यांवा की ग्राम पंचायत पनिहैया का है। गांव में कई पात्रों के नाम शौचालए आए हैं। इसी में एक शौचालय ग्राम पंचायत के मजरा महमदापुर निवासी गीता पत्नी रामचन्द्र को मिला है। गीता का आरोप है कि हाल ही में उसके खाते में शौचालय की पहली किश्त 6000 रूपए आए। ग्राम प्रधान ने यह कहकर रूपए ले लिए कि इसी से सारा सामान मंगा देगा।
महिला का आरोप है कि प्रधान को रूपए लिए कई दिन हो गए। इसके बाद अभी न तो रूपए वापस किए गए न ही निर्माण सामग्री मंगवाई गई। कई बार जब ग्राम प्रधान से रूपयों की मांग की गई तो वह लड़ाई पर अमादा हो गया। महिला ने यह भी बताया कि कई बार मामले की शिकायत आला अधिकारियों से की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मालूम हो कि गाँवों के प्रधान अपनी कमाई का हथियार शौचालयों को बनाए हैं। इसमें पात्रों को सस्ती दर पर निर्माण सामग्री खरीदने का हवाला देकर पहली किश्त के सारे रूपए लिए जा रहे हैं। इसके बाद कुछ चहेतों को रूपए वापस कर उनका शौचालय निर्माण करवाया जा रहा है। इसके अलावा जिन लोगों के रूपए लिए, उनका शौचालय भी नहीं बन सकता। तो पात्रों की दूसरी किश्त भी नहीं पास हो रही है। लेकिन जिला प्रशासन इस समस्या के प्रति संजीदा नहीं दिख रहा है।
ब्लॉक टडि़यांवा के गांव महमदापुर में केवल शौचालय के नाम पर नहीं बल्कि आवासों के नाम पर भी प्रधान ने जमकर भोग लगाया। जनता को देना तो दूर लेना शुरू कर दिया। गांव निवासी भगवानदीन पुत्र नरपति, बलट्टर पुत्र राजाराम का कहना है कि ग्राम प्रधान ने आवास दिलाने की एवज में 10 हजार मांगे। जो पहले देने की बात कहने पर दिए गए लेकिन इसके बावजूद आवास नहीं मिल सका। जब मामले की शिकायत की तो कोई सुनवाई नहीं हुई।