भारतीय मूल के सांसदों से प्रधानमंत्री का आग्रह कि वह भारत के विकास में उत्प्रेरक के रूप में काम करें

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में आज विश्व के विभिन्न देशों से आए भारतीय मूल के सांसदों के प्रथम सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत किसी दूसरे देश की भूमि और संसाधनों पर नजर नहीं रखता है और न ही भारत का विकास सहायता मॉडल लेन-देन पर आधारित है । भारत ने विश्व व्यवस्था में हमेशा रचनात्मक और सकारात्‍मक भूमिका निभाई है । मालूम हो कि भारतीय उप-महाद्वीप में चीन द्वारा अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों के बीच श्री नरेन्द्र मोदी का यह बयान आया है।

श्री मोदी ने भारतीय मूल के सांसदों से कहा कि जब विश्व सिद्धांतों को लेकर विभाजित है उस समय भी भारत सबका साथ, सबका विकास के मंत्र में विश्वास रखता है । हमने किसी भी देश के साथ अपनी नीतियों को लाभ-हानि के आधार पर नहीं देखा है । भारत इसे मानवीय मूल्यों की नजर से देखता है । भारत संसाधनों संसाधनों का शोषक नहीं है और न किसी क्षेत्र पर हमारी नजर है । हमने सदैव संसाधनों के उत्तम प्रयोग पर बलदिया है । आप लोग लम्‍बे समय से अलग – अलग देशों में रह रहे हैं । आप सब ने भी अनुभव किया होगा कि पिछले तीन से चार वर्षो में भारत के प्रति पूरे विश्‍व का नजरिया बदला है । भारत को विश्व बिरादरी आज जो तवज्जो दे रही है उसका मुख्‍य कारण यही है कि भारत सकारात्मकता के पथ पर चलते हुए परिवर्तनों को अंगीकार कर रहा है । उन्होंने सांसदों से आग्रह किया कि वह भारत के विकास में उत्प्रेरक के रूप में काम करें ।