कोथावाँ प्रा०वि० का हाल, बच्चों को दूध और फल नहीं दे रहे जिम्मेदार

माइक्रो प्लान के तहत टीमें गाँव-गाँव जाकर कर रही टीकाकरण

कछौना (हरदोई) : आज हम पोलियो मुक्त भारत की स्थित देख रहे हैं। वह सिर्फ वैक्सीन की बदौलत संभव हुई है। कोविड-19 महामारी के संक्रमण ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। एक वर्ष बाद सरकार व स्वास्थ विभाग की कड़ी मेहनत की बदौलत वैक्सीन की खोज हुई। लोगों में एक नई उम्मीद व उत्साह देखने को मिला।

मालूम हो कि कोविड-19 की दूसरी लहर ने सभी को झकझोर दिया। स्वास्थ्य विभाग की पोल खुल गई। सरकार की प्राथमिकता में स्वास्थ्य न होने का खामियाजा आम जनमानस को उठाना पड़ा। कोविड-19 संक्रमण का बचाव का एकमात्र उपाय शारीरिक दूरी, मास्क का प्रयोग, हाथों की सफाई व टीकाकरण का उपयोग है। टीकाकरण के लिए एक अभियान चलाया गया।गांव-गांव व वार्ड वार, बैंकों में टीकाकरण अभियान के तहत कैंप लगाए जा रहे हैं। टीम में ग्राम प्रधान, लेखपाल, आशा, आंगनवाड़ी वर्कर, प्राथमिक स्कूल के प्रधानाध्यापक शामिल होकर आम जनमानस में जागरूकता व लोगों में फैली भ्रांतियों को दूर करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। 18 वर्ष से ऊपर सभी को कोविड वैक्सीन लगवानी है। माइक्रो प्लान के तहत टीमें गांव गांव जा रही हैं। एक भी व्यक्ति छूटने न पाए। एक भी शख्स छूता तो समझो सुरक्षा चक्र टूटा, कस्बे की एक महिला ने उच्च अधिकारियों से शिकायत की, उन्हें 17 मई को पहली डोज़ के रूप में को-वैक्सीन लगी थी, जिसकी दूसरी डोज़ 14 जून को लगनी थी, स्टाफ की अनुपलब्धता के कारण 23 जून को वैक्सीन लगाई गई। जिसमें स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही से महिला को कोविशील्ड लगाई गई। जबकि नियमानुसार सामान डोज़ लगनी चाहिए। इससे महिला मानसिक रूप से काफी परेशान है। स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया। इस संबंध में अधीक्षक डॉ० किसलय बाजपेई से पक्ष जानने पर उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कोई दिक्कत की बात नहीं है, परेशान न हों।

रिपोर्ट – पी०डी० गुप्ता