कोथावाँ प्रा०वि० का हाल, बच्चों को दूध और फल नहीं दे रहे जिम्मेदार

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

यहाँ उन शब्दों के प्रयोग के लिए अनुरोध किया गया है, जो शुद्ध हैं और उपयुक्त भी। कृपया अपने लेखन में उन शुद्ध शब्दों को स्थान देकर, समाज का भाषिक मार्गदर्शन करें।

★ ‘प्रावधान’ के स्थान पर ‘प्रविधान’ का प्रयोग कराना उपयुक्त है।

नीचे सकारण ‘प्रविधान’ शब्द को शुद्ध और उपयुक्त सिद्ध किया गया है। यदि कोई प्रश्न अथवा शंका उत्पन्न हो तो उसका स्वागत रहेगा।

नियम-क़ानून के भाव में प्रयुक्त शुद्ध और उपयुक्त शब्द–
प्रविधान– प्र+विधान = प्रविधान।
प्र— यह एक प्रकार का उपसर्ग है, जिसके अर्थ हैं :– श्रेष्ठ, प्रकृष्ट, उत्कृष्ट, विशिष्ट इत्यादिक।)

विधान— नियम। जैसे– विधि-विधान, विधिवत् इत्यादिक।
इसकी परिभाषा है– वह उपाय, जिसके अनुसार काम किया जाता है, ‘प्रविधान‘ कहलाता है।
प्रावधान– प्र+अवधान = प्रावधान

प्र-– प्रकृष्ट, उत्कृष्ट, विशिष्ट, श्रेष्ठ इत्यादिक।

अवधान— एकाग्र अथवा सावधान होने की अवस्था अथवा भाव।

इसी शब्द से ‘सावधान’ की रचना हुई है– स+अवधान = सावधान।

ऐसे में, सहज प्रश्न है– प्रावधान से ‘नियम-क़ानून’ के भाव का अर्थ कहाँ निकल रहा है? इस प्रकार ‘प्रावधान’ के स्थान पर ‘प्रविधान’ का प्रयोग शुद्ध और उपयुक्त है।

★ आरोपी-आरोपित— जिस पर आरोप लगाया जाये– इस अर्थ में शुद्ध शब्द ‘आरोपित’ है; जैसे– दो आरोपित पकड़े गये।

जो आरोप लगाता है, वह ‘आरोपी’ कहलाता है; जैसे– उसने मेरे घर में घुसकर चोरी की है।

‘ठेका-ठेकेदारी’ के स्थान पर ‘ठीका-ठीकेदारी’ का प्रयोग करें। ठेका संगीत की शब्दावली है; जैसे– ठेका लगाना। तबला बजाने के एक प्रकार का नाम ‘ठेका’ है।

ठीका— नियत समय अथवा दर पर किसी काम के करने का अनुबन्ध ‘ठीका’ है।

★ शुद्ध शब्द कार्यालयीय, विद्यालयीय, मन्त्रालयीय
शुद्धीकरण, तुष्टीकरण, प्रस्तुतीकरण, शिक्षणेतर, पाठ्येतर, कार्यकर्त्री हैं।

स्वजन (रक्त-सम्बन्धी), परिजन (अन्य लोग; नौकर-चाकर)। जन का अर्थ ही ‘लोग’ है, अत: जन से ‘जनों’ का प्रयोग अशुद्ध है।

शुद्ध प्रयोग है— अलख जगाया
यह ‘अलक्ष्य’ का तद्भव शब्द है।
अलख विशेषण-शब्द है, जिसका अर्थ है– जो देखा न जा सके। इसे ही ‘अगोचर’ भी कहते हैं। अलख, अलक्ष्य, अगोचर इत्यादिक ‘परमेश्वर’ के लिए प्रयुक्त होता है।

तिथि के बाद अल्प विरामचिह्न (,) लगाकर वर्ष लिखा जाता है; जैसे– २१ मार्च, २०२१

★ ‘गोकशी’ शब्द का प्रयोग अशुद्ध है। शुद्ध शब्द ‘गोकुशी’ है, जैसे ख़ुदकुशी। इसमें दो शब्द हैं :– पहला, ‘गो’ और दूसरा ‘कुशी’। पहला शब्द संस्कृतभाषा का है, जिसका अर्थ ‘गाय’ है, जबकि दूसरा शब्द ‘कुशी’ फ़ारसी का है, जिसका अर्थ ‘मार डालना’ है; जैसे– ख़ुदकुशी– स्वयं को मार डालना, आत्महत्या। अत्युत्तम तो यह है कि ‘गोवध’/गो-वध’ का प्रयोग हो।

★ अँगरेज़ी में साइंटिस्ट की हिन्दी ‘विज्ञानी’ है, न कि वैज्ञानिक। साइंटिफ़िक को ‘वैज्ञानिक’ कहते हैं। ऐसा इसलिए कि साइंटिस्ट संज्ञा-शब्द है, जबकि साइंटिफ़िक विशेषण-शब्द है। उदाहरण के लिए– (१) वह भाषाविज्ञानी है। (२) भाषावैज्ञानिक दृष्टि से भी यह शब्द व्याकरण-सम्मत है। (३) डॉ० हरगोविन्द खुराना एक विज्ञानी थे। (४) उस विज्ञानी के तर्क के पीछे वैज्ञानिक कारण भी हैं। (५) फ्रायड के मनोवैज्ञानिक सिद्धान्त आज भी प्रासंगिक हैं। (६) अपना उपचार किसी मनोविज्ञानी से कराओ।

★ ‘दूसरे प्रदेशों में’ का प्रयोग अनुपयुक्त है। इसके स्थान पर ‘दूसरे राज्यों’ में होगा। ऐसा इसलिए कि हमारे संविधान में ‘केन्द्र और राज्य-सरकार’ का प्रयोग है, न कि ‘प्रदेश-सरकार’ का, फिर उत्तरप्रदेश, तमिलनाडु आदिक राज्य हैं, न कि प्रदेश।।

★ भिन्न-भिन्न स्थानों से प्रतियोगियों ने भाग लिया।– यदि ये सभी प्रतियोगी एक ही दिन और एक ही समय पर भाग लेंगे तभी ‘भाग लिया’ का प्रयोग होगा, अन्यथा ‘भाग लिये’ होगा। ‘इस्तीफ़ा दिया’, ‘आवेदनपत्र भरा’, ‘परीक्षा दिया’ इत्यादिक के सन्दर्भ में भी यही नियम लागू होगा।

दुख शब्द अशुद्ध है, शुद्ध शब्द ‘दु:ख’, ‘दु:खद’, ‘दु:खी’। मूल शब्द ‘दु:ख’ है, जो ‘अच्’ प्रत्यय के योग से हमें प्राप्त होता है। ‘दु:’ उपसर्ग है, जो बुरा, कठिन आदिक के अर्थ में प्रयुक्त होता है।

‘छह’ अशुद्ध शब्द है। शुद्ध शब्द ‘छ:’ है। छ में (:) विसर्ग की ‘अह’ की ध्वनि लेकर ‘छह’ बना दिया गया, जो कि हास्यास्पद प्रयोग बन गया।

★ ‘सुख और दु:ख दोनों हमारे जीवन में हैं।’ यहाँ ‘दोनों’ का प्रयोग अशुद्ध है। ऐसा इसलिए कि जब हमें ‘सुख’ और ‘दु:ख’ ‘दो’ दिख ही रहे हैं तब ‘दोनों’ के प्रयोग का कोई औचित्य नहीं है, फिर व्यावसायिक दृष्टि से ‘एक शब्द’ कम भी हो जाता है।

‘जब’ के साथ ‘तब’; ‘यदि’ के साथ ‘तो’; ‘यद्यपि’ के साथ ‘तथापि’; ‘भले ही’/’हालाँकि’ के साथ ‘फिर भी’ का प्रयोग होगा।

★ ‘लेकिन’ के आगे अल्प विरामचिह्न (,) का प्रयोग नहीं होता; जैसे– उसे बहुत समझाया लेकिन, उसने मेरी बात नहीं मानी। इसके स्थान पर होगा– उसे बहुत समझाया; लेकिन उसने मेरी बात नहीं मानी। विशुद्ध प्रयोग अर्द्ध विरामचिह्न (;) है।

★ ‘उसने ख्याल नहीं किया।’ यहाँ ‘ख्याल’ के स्थान पर ‘ख़याल’ होगा; क्योंकि ‘ख्याल’ संगीत की एक पारिभाषिकी है।

★ ‘रुखसत’ का प्रयोग अशुद्ध है; शुद्ध शब्द ‘रुख्सत’ है, जो कि अरबी-भाषा का शब्द है।

शुद्ध शब्द ‘मिष्टान्न’ है— मिष्ट+अन्न= मिष्टान्न– मीठा अन्न।
मिष्ठान अथवा मिष्ठान्न का प्रयोग अशुद्ध है।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १५ अप्रैल, २०२१ ईसवी।)