संजय सिंह, सांसद, आप ने पेयजल एवं स्वच्छता मिशन पर उठाए सवाल! | IV24 News | Lucknow

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

भाषाविद्-समीक्षक आचार्य पं॰ पृथ्वीनाथ पाण्डेय

यहाँ पृथक् प्रकार के तीन वाक्य दिये गये हैं, जो दोषपूर्ण हैं। वे दोष कई प्रकार के हैं। वाक्य की प्रकृति को समझते हुए, हमने उन सभी दोषों पर सांगोपांग विचार करते हुए, उनका दोषमुक्त रूप यहाँ प्रस्तुत किया है।

पहले आप उन अशुद्ध वाक्यों को समझें, जो नीचे दिये गये हैं :—
निम्नांकित वाक्यों को शुद्ध कीजिए :—
१- यद्यपि परिचर्या सुश्रूसा की पर्याय हैं परन्तु इनमें तात्विक अन्तर है।
२- वहाँ पर औरत, आदमी, भेंड़, बकरी घूम रहा है।
३- धूम्रपान स्वास्थ के लिए ज़ोख़िम हैं।

व्याकरणसम्मत उत्तर :—
प्रथम प्रकार का वाक्य ‘अनिश्चित वर्तमान काल’ का है। इसमें दो वाक्यांश हैं :– प्रथम वाक्यांश, ‘यद्यपि परिचर्या सुश्रूषा की पर्याय हैं’ है और द्वितीय वाक्यांश है : ‘इनमें तात्विक अन्तर है’। यहाँ प्रथम वाक्यांश का आरम्भ जिस ‘यद्यपि’ से हो रहा है, वह ‘अविकारी शब्द’/ अव्यय है और जो शब्द ‘परन्तु’ इन दोनों वाक्यों को जोड़ने का कार्य कर रहा है, वह भी ‘अविकारी’/अव्यय है।

अब हमें इस पूरे वाक्य को व्याकरण की कसौटी पर कसना है। जब भी कोई वाक्य ‘यद्यपि’ से आरम्भ होता है, उसे जोड़ने का कार्य ‘तथापि’ करता है; अर्थात् ‘यद्यपि-तथापि’ एकसाथ रहते हैं। शुद्ध शब्द ‘शुश्रूषा’ (स्त्रीलिङ्ग) है, जिसका अर्थ ‘देखभाल’, ‘सेवा-टहल’ इत्यादिक है और ‘परिचर्या’ का भी यही अर्थ है। ‘पर्याय’ शब्द पुंल्लिङ्ग है, अत: ‘शुश्रूषा का’ होगा; जैसे ‘पुत्री का पुत्र’ है। यहाँ व्यवहृत ‘परन्तु’ के स्थान पर ‘तथापि’ प्रयुक्त होगा। ‘शुश्रूषा का पर्याय’ एकवचन में है अत: क्रिया भी एकवचन की होगी। इसप्रकार ‘पर्याय हैं’ के स्थान पर ‘पर्याय है’ क्रिया बनेगी। शुद्ध शब्द ‘तत्त्व’ (संज्ञा) है, जिससे ‘तात्त्विक’ (विशेषण) का सर्जन होता है।

बताये गये उक्त नियमों के आधार पर प्रथम वाक्य का शुद्ध रूप निम्नांकित है :—
१- यद्यपि परिचर्या शुश्रूषा का पर्याय है तथापि इनमें तात्त्विक अन्तर है।

अब हम द्वितीय वाक्य का परीक्षण करते हैं। यह वाक्य ‘अपूर्ण वर्तमान काल’ का है। शुद्ध शब्द ‘भेड़’ है, न कि ‘भेंड़’। व्याकरण का अनुशासन बताता है कि जब किसी भी प्रकार के वाक्य में एक से अधिक कर्त्ता हों तब क्रिया अन्तिम कर्त्ता के अनुसार होगी, जबकि वचन ‘बहु’ होगा। इस वाक्य में ‘आदमी’, ‘औरत’, ‘भेड़’ तथा ‘बकरी’ कर्त्ता हैं, अत: क्रिया अन्तिम कर्त्ता ‘बकरी’ के लिङ्ग ‘स्त्रीलिङ्ग’ के अनुसार होगी। चूँकि यहाँ कर्त्ता एक से अधिक हैं इसलिए क्रिया बहुवचन की होगी। ‘भेड़-बकरी’ एकसाथ प्रयुक्त होनेवाले शब्द हैं, जो ‘द्वन्द्व’ समास के दृष्टान्त हैं; ‘भेड़ और बकरी’ के रूप में। इसप्रकार ‘भेड़’ के बाद तथा’ (भेड़ तथा बकरी) का प्रयोग होगा।

इन नियमों के आधार पर द्वितीय वाक्य का शुद्ध रूप है :–
२- वहाँ पर औरत, आदमी, भेड़ तथा बकरी घूम रही हैं।

तृतीय प्रकार का वाक्य ‘अनिश्चित वर्तमान काल’ का है। शुद्ध शब्द है, ‘धूम’ (संज्ञा) जिसका अर्थ ‘धुआँ’ है। ‘स्वस्थ’ के स्थान पर ‘स्वास्थ्य’ होगा। ज़ोख़िम’ शब्दप्रयोग अनुपयुक्त है; उपयुक्त शब्द ‘जोख़िम’ है, फिर उक्त वाक्य की प्रकृति के अनुसार, यहाँ पर ‘जोख़िमभरा’/ ‘जोख़िमयुक्त का प्रयोग होगा और क्रिया ‘हैं’ के स्थान पर ‘है’ हो जायेगी।

इस प्रकार व्याकरणसम्मत वाक्य है :—
३- धूमपान स्वास्थ्य के लिए जोख़िमभरा है।

(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १४ दिसम्बर, २०१९ ईसवी)