सवर्ण कौन?

“सह (साथ) + वर्ण (वरीय/सुपात्र) = सवर्ण (वरीयता/सुपात्रता के साथ)”।

जिस प्राणी अर्थात मनुष्य का मानवजीवनविकास के चारों आयाम (4Q’s अर्थात शारीरिक-PQ/मानसिक-IQ/भावनात्मक-EQ/चेतनात्मक-SQ) पूर्णतः विकसित हों या अधिकांश रूप से विकसित हों उन्हे ही सवर्ण की उपाधि दी जाती है।

अर्थात जिस भी मनुष्य की मनुष्यता के चारों लक्षण पूर्ण रूप से या अधिकांशतः विकसित हों वही सवर्ण की वरीयता/उपाधि प्राप्त कर सकता है।

वर्तमान में न तो हिंदुओं में न मुसलमानों में न ही अन्य समुदायों में कोई सवर्ण बचा है।

वर्तमान में अधिकांश मनुष्य अपनी दलित अर्थात कुवर्ण/अवर्ण दशा को ही प्राप्त हैं।

सवर्ण या दलित उपाधि का सम्बंध मानवीय शिक्षा व उसके प्रशिक्षण से विकसित हुए मनुष्यत्व की श्रेष्ठता से सम्बंधित है।

इसलिए खुद को सुशिक्षित-प्रशिक्षित करने हेतु अपनी सरकारों से निःशुल्क अनिवार्य व अबाध्य रूप से
“”न्यायोचित पूर्ण शिक्षा-प्रशिक्षण का संवैधानिक जनाधिकार”” माँगिये ताकि श्रेष्ठ व सवर्ण बन सको।

✍ राम गुप्ता- स्वतंत्र पत्रकार Nyaya Hindi (न्याय हिन्दी)