चंदा तेरे कितने रूप

October 20, 2024 0

चंद्रमा पूजनीय है क्योंकि हमारे शास्त्रों में चंदा को ब्रह्माजी का मानस पुत्र कहा गया है। चंद्रमा को लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त है, इसलिए सुहागिन स्त्रियां कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि […]

बारिश के बहाने!

July 9, 2022 0

आजकल की अधिकतर फिल्मों के फूहड़ और कानफोड़ू गीत मैं सुनता नहीं हूं और कभी गलती से सुन भी लेता हूं तो मुझे समझ नहीं आता है कि गायक चिल्ला क्या रहा है। लेकिन पुराने […]

पी०वी० नरसिंहराव का पूरा जीवन विरोधाभास की कहानी है!

June 28, 2022 0

1991 में प्रणव मुखर्जी के समर्थन से प्रधानमंत्री बने लेकिन उनको वित्तमंत्री न बनाकर राजनीति के क्षेत्र में बिल्कुल नौसिखिए आरबीआई के पूर्व गवर्नर मनमोहन सिंह पर भरोसा किया। 1966 में इंदिरा गांधी द्वारा रुपये […]

स्वार्थलिप्सा, राजनीति ही नहीं वरन सामाजिक जीवन को भी दंश दे रही है

December 13, 2021 0

मौजूदा धूर्त कुराजनीति के ‘निजी स्वार्थ’ से शायद ही कोई अछूता हो!फिर भी जिन्हें लगता है वे नही हैं, उनके लिए ये आर्टिकल अतिमहत्त्वपूर्ण है। अवश्य पढ़ें; निजी स्वार्थलिप्सा का सबसे महत्त्वपूर्ण कारण है “अवरीयता” […]

सवर्ण कौन?

October 10, 2021 0

“सह (साथ) + वर्ण (वरीय/सुपात्र) = सवर्ण (वरीयता/सुपात्रता के साथ)”। जिस प्राणी अर्थात मनुष्य का मानवजीवनविकास के चारों आयाम (4Q’s अर्थात शारीरिक-PQ/मानसिक-IQ/भावनात्मक-EQ/चेतनात्मक-SQ) पूर्णतः विकसित हों या अधिकांश रूप से विकसित हों उन्हे ही सवर्ण की […]

शहर-ए-लखनऊ न जाने कितने राज़ ख़ुद में समेटे हुए

June 13, 2021 0

शाश्वत तिवारी : उनके किस्सों की मिठास लखनऊ ही नहीं मुल्क के कई सूबों में लोगों के होंठों पर बसती है। उर्दू अदब से जुड़े, लखनऊ की रुहेरवां भाई हिमांशु बाजपेई का आज जन्मदिन है। […]

ऐसे कर्मयोगी और हिन्दी पत्रकारिता के हस्ताक्षर को मेरा सलाम

May 31, 2021 0

शाश्वत तिवारी : जिस दौर की पत्रकारिता की प्रामाणिकता और विश्वसनीयता पर ढेरों सवाल हों, ऐसे समय में हेमन्त शर्मा की उपस्थिति हमें आश्वस्त करती है कि सारा कुछ खत्म नहीं हुआ है। सही मायने […]

अजेय नहीं था ग़ुलाम मुहम्मद बख्श ‘गामा पहलवान’ ?

May 30, 2021 0

गामा पहलवान को गूगल कीजिये, तो आपको बताया जाएगा कि गामा पहलवान, जीवन में किसी से नहीं हारे, लेकिन ये सत्य नहीं है | गामा पहलवान का असली नाम ग़ुलाम मुहम्मद बख्श था | भारत […]

अंत्योदय-संकल्प पूरा करने के लिए पंचायत चुनाव ज़रूरी

March 30, 2021 0

(शाश्वत तिवारी) : यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी ने विस्तृत कार्य योजना पर अमल तेज कर दिया है। पंचायतों में विजय लक्ष्य पूरा करने का […]

माया : एक अनुशीलन

February 22, 2021 0

आत्मिक संदेश ★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय यह संसार अशरीरी से संत्रस्त है। निदर्शनस्वरूप प्रथम स्थान ‘माया’ का है और द्वितीय स्थान ‘कामदेव’ का। माया और अनंग (कामदेव) की सर्वत्र व्याप्ति है। दोनों का अस्तित्व […]

शिक्षक दिवस पर विशेष : “नायमात्मा बलहीनेन लभ्य”

September 5, 2020 0

डाॅ. निर्मल पाण्डेय (इतिहासकार/लेखक) शिक्षा का सही उद्देश्य बताते एक उद्बोधन में, जिसे डॉ. राधाकृष्णन ने 23 जनवरी 1957 को कलकत्ता विश्वविद्यालय शताब्दी वर्ष में उपाधि-वितरण-समारोह के अवसर पर दिया था, कहते हैं: ‘पुराने विश्वविद्यालयों […]

चीन को चारों ओर से घेरने की भारतीय रणनीति

July 3, 2020 0

‘मुक्त मीडिया’ का ‘आज’ का सम्पादकीय — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय भारत-चीन-सीमा पर आज (३ जुलाई) जाकर प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी का सीमा पर डटे भारत के सैनिकों से मिलना; घायल भारतीय सैनिकों को सुखद आश्वासन […]

शिक्षा-परीक्षा को कलुषित और निरर्थक करती हमारी व्यवस्था

June 1, 2020 0

‘मुक्त मीडिया’ का ‘आज’ का सम्पादकीय —- आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय श्रमिक-वर्ग की बेकारी उतना चिन्त्य नहीं है जितना कि शिक्षित-वर्ग की। श्रमिक-वर्ग कहीं-न-कहीं सामयिक काम पाकर अपना जीवन-यापन कर लेता है; परन्तु शिक्षित-वर्ग जीविका […]

आज ८ मार्च है– अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस : परम्परा का तक़ाज़ा जो है

March 8, 2020 0

पृथ्वीनाथ पाण्डेय : नारी-समाज में और नारी-समाज के प्रति जागरूकता आज बढ़-चढ़कर दिख रही है। आज के समाचार-चैनलों और कल के अख़बारात में परम्परा का भराव दिखेगा और ९ मार्च के बाद से अगले ७ […]

खुदा मुझे इलाहाबादी खुराफ़ातियों से बचाये : मिर्ज़ा ग़ालिब (पुण्यतिथि विशेष)

February 15, 2020 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (भाषाविद्-समीक्षक) ● आज (१५ फ़रवरी) मिर्ज़ा ग़ालिब की पुण्यतिथि है । जाने क्यों, असद उल्लाह बेग़ ख़ाँ ‘मिर्ज़ा ‘ग़ालिब’ जैसे ज़हीनी अदीब और बेमिसाल शाइर के साथ ऐेसा कौन-सा वाक़िआ हुआ कि […]

अपनी बेटियों को ‘श्रीमती’ नहीं, ‘शक्तिमती’ बनाइए!

October 9, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय नपुंसक और पुरुषार्थविहीन हैं वे, जो बेटी बचाने की बात तो करते हैं; परन्तु उन्हीं के लोग जब बेटियों का शीलहरण करते हैं तब वे ‘शीलहरणकर्त्ताओं’ के साथ खड़े होते दिखायी पड़ते […]

हिन्दी दिवस विशेष :- “हिन्दी हमारी जीवनशैली एवं हमें हमारी मां की तरह प्यारी है”

September 13, 2019 0

शिवांकित तिवारी “शिवा”          हिन्दी सिर्फ भाषा नहीं,बल्कि यह हमारे अल्फाजों को समेट, हमारी बातों को सरलता एवं सुगमता से कहने का विशेष माध्यम हैं। हिन्दी बिल्कुल हमारी की तरह ही हमसे […]

“सुरमई अँखियों में इक नन्हा-मुन्ना सपना दे जा रे!”

August 6, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय  अभिनय में वह शक्ति है, जो पाषाण को भी द्रवीभूत कर दे। ‘सदमा’ अर्थात् आघात मनुष्य को एक ऐसी मानसिक अवस्था में प्रवेश कराता है, जहाँ उसका जीवन किसी अभिनय से अल्पतर […]