★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
फ़ारुक़ अहमद डार उर्फ़ बिट्टा कराटे ने १९ जनवरी, १९९० ई० को २० कश्मीरी पण्डितों की हत्या की थी। उसने अपना ज़ुर्म क़ुबूल भी किया था। यासीन मलिक भी उसमे शामिल था, तब तत्कालीन सरकार ने उसके विरुद्ध काररवाई क्यों नहीं की थी? यासीन मलिक ने मार्च, १९९० ई० मे भारतीय वायुसेना के चार सैनिकों की हत्या की थी। प्रश्न है-- तब किस राजनैतिक दल का शासन था? वे दोनो अभियुक्त वर्ष २०१९ से जेल मे बन्द हैं; परन्तु आश्चर्य है, वर्तमान सरकार अभी उन्हें पाल-पोस रही है। प्रश्न हैं, अभी तक उन्हें ज़िन्दा क्यों रखा गया है? प्रकारान्तर से उनकी 'आत्महत्या' क्यों नहीं हुई है?
कथित कश्मीरी पण्डितों की हत्या की जा रही थी, तब किसकी सरकार थी? उस सरकार ने कश्मीर पण्डितों का संरक्षण क्यों नहीं किया था? क्या उस साम्प्रदायिक दंगे मे सिर्फ़ 'कश्मीरी पण्डित' मारे गये थे? इस पर 'द कश्मीर फ़ाइल्स' लिखनेवाले व्यक्ति को लक़्वा क्यों मार गया था?
... और अब, जब तथाकथित प्रचण्ड बहुमत की कट्टर हिन्दूवादी सरकार अस्तित्व मे आयी है, उसने अब तक कश्मीरी पण्डितों के आँसू पोछने के लिए कौन-कौन-से कृत्य किये हैं, इन विन्दुओं पर 'द कश्मीर फ़ाइल्स' मौन क्यों है?
मै इस विषय पर निकट भविष्य मे सविस्तार लिखूँगा, जो सच को प्याज के छिलके की तरह से उतारता दिखेगा।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २० मार्च, २०२२ ईसवी।)