बिलग्राम (हरदोई)- नगर के स्थानीय एस.डी. पब्लिक स्कूल में दो साहित्यकारों द्वारा लिखी गई पुस्तकों का विमोचन किया गया।
जहां पर जनपद की कई नामचीन हस्तियों की उपस्थिति रही। जिसमें राजनीतिक व साहित्यकारों ने अपने विचार व्यक्त किए। इस दौरान सभी ने दोनों लेखकों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए बधाई दी, जिन दो पुस्तकों का विमोचन किया गया उसमें प्रसिद्ध उर्दू इतिहासकार फ़रीद बिलग्रामी द्वारा हिंदी में लिखित राजनीतिक एवं साहित्यिक इतिहास पर आधारित *बिलग्राम* नामक पुस्तक व नगर के प्रमुख समाजसेवी जय नारायण अवस्थी द्वारा लिखे गए उपन्यास *ताम्र पत्र* का विधिवत विमोचन किया गया।
इस कार्यक्रम के विमोचन अवसर पर जनपद के वरिष्ठ राजनेता व पूर्व मंत्री डॉ अशोक बाजपेयी,पूर्व विधायक सतीश वर्मा, रजनी तिवारी विधायक शाहाबाद,बिलग्राम मल्लावां विधायक आशीष सिंह आशू,अरुणेश बाजपेयी, पूर्व मंत्री व सपा जिलाध्यक्ष राजेश यादव माधौगंज नगर पालिका अध्यक्ष अनुराग मिश्रा,शुरेश चन्द्र तिवारी, प्रो. अतहर अली सिद्दीकी, नगर पालिका बिलग्राम अध्यक्ष हबीब अहमद खां क़ाज़ी उबैद क़ाज़ी फाज़िल गुफरान सहित अनेक लोगों की उपस्थिति में दोनों साहित्यकारों का सम्मान करते हुए उनके द्वारा लिखी गई पुस्तकें विमोचन की गई।
इस दौरान अतिथियों को प्रतीक चिन्ह भेंट कर आयोजकों ने उनका स्वागत किया।स्वागत करने वालों में प्रमेश तिवारी के साथ उनकी पत्नी वंदना तिवारी ,अक्षत अवस्थी ,डॉ कपिल देव त्रिपाठी, आदि लोग रहे।कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि के रूप में डॉ अशोक बाजपेयी द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलन किया गया।इस दौरान जनपद के वरिष्ठ लेखक व पत्रकार अरुणेश बाजपेयी भी साथ रहे।कार्यक्रम के बीच में नगर के ख्यातिप्राप्त शायरों ने दोनों लेखकों की शान में कसीदे भी पढ़े।जिनका आयोजन समिति द्वारा सम्मान किया गया।
बिलग्राम पुस्तक के लेखक फ़रीद बिलग्रामी के बारे में पुस्तक दर्शा रही है कि वह सन 1972 में नगर पालिका बिलग्राम में कार्य करने के लिए आये थे।तभी से उन्होंने उर्दू व हिंदी अखबार में पत्रकारिता करते हुए अपने लेखन में आगे बढे।उनकी चार किताबें उर्दू में पूर्व में प्रकाशित हो चुकी हैं।साथ ही समय समय पर उर्दू व हिंदी में कविता व शायरी विभिन्न अखबार प्रकाशित करते हैं।इतना लंबा अनुभव ही उनकी उक्त किताब में बिलग्राम के बारे में बयां करता है।
जबकि ताम्र पत्र उपन्यास के लेखक श्री अवस्थी ने अपनी लेखनी का पूरा श्रेय अपने ब्रम्हलीन गुरु श्री स्वामी दिव्यानन्द जी सरस्वती को देते हुए उन्हीं के मार्गदर्शन का नतीजा बताया है।जिसमें राष्ट्र हित में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर शहीदों में किसी भी क्रांतिकारी की शौर्य गाथा का पाठक याद करते हुए अगर उनके बलिदान को मूल्यांकन कर सके।तो वह अपने आप को धन्य समझेंगे।
उक्त दोनों पुस्तकें बीते दिन समारोह में सभी के लिए उपलब्ध कराई गई।जिनको पढ़कर नगर में नव युवकों में लेखन व चिंतन का दौर शुरू हो गया।जिसे प्रसिद्ध साहित्यकारों ने एक अच्छा माहौल बताया।
इस अवसर पर जनपद के वरिष्ठ पत्रकार अरुणेश बाजपेई ने कहा कि उन्हें यह नही पता था कि श्री अवस्थी रचनाकार भी है ।वह तो उन्हें केवल कविताकार ही मानते थे।आज बहुत खुशी हो रही है कि अवस्थी जी ने जो पुस्तक लिखी है वह अपने आप में बहुत गौरव की बात है।