शिवांकित तिवारी “शिवा”, युवा कवि एवं लेखक, सतना (मध्यप्रदेश) संपर्क:- 7509552096

मुझ पर तानें कस रहा है वो,
मेरे जख्मों पर हँस रहा है वो ।
गुरुर की नाव में सवार होकर चला था,
अब बीच मझधार में आकर फंस रहा है वो ।
बड़ा होकर बदल जायेगा ये भरम था मेरा,
आसमां में उड़ने की जगह जमीं में धंस रहा है वो ।
आंखों पर काली पट्टी बांध कर चल रहा था,
और इल्ज़ाम दूसरों पर लगा कर बिहंस रहा है वो,
बाप ने बड़ी मशक्कत से जो ये संपत्ति बनाई थी,
अपने ऐशों-आराम की खातिर कर,
उसे तहस नहस कर रहा है वो ।
मां – बाप ने उसके बहुत सपने सजोये थे उसको लेकर
किसी लड़की की चाहत में हाथ की काट नस रहा है वो ।