★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
भारत के ‘प्रथम चीफ़ ऑव़ डिफेंस स्टाफ’ (सी० डी० एस०) प्रमुख रक्षा-अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत और उनकी सहधर्मिणी मधूलिका रावत तमिलनाडु ज़िले के किन्नूर में अकस्मात् हेलीकॉप्टर-दुर्घटना होते ही दर्दनाक मृत्यु को प्राप्त कर गये। उस दुर्घटना में जनरल बिपिन रावत-सहित १३ लोग की मृत्यु हो गयी थी। विमान में सवार पॉयलट और क्रू मेम्बर-सहित कुल १४ लोग सवार थे, जिनमें ५ क्रू मेम्बर थे। ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह गम्भीर रूप से घायल हैं, जिनका उपचार वेलिंगटन-स्थित सैन्य चिकित्सालय में किया जा रहा है। वह विमान हेलीकॉप्टर– ‘एम आइ– १७ वी-५’ था, जिसके पॉयलट विंग कमाण्डर पृथ्वी सिंह चौहान थे। वे १०९ हेलीकॉप्टर युनिट के कमाण्डिंग ऑफ़ीसर थे। विमान ‘सुलूर से वेलिंगटन’ के लिए उड़ान भर चुका था।

ज्ञातव्य है कि देश के प्रथम रक्षा-प्रमुख जनरल बिपिन रावत वेलिंगटन में एक कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए जा रहे थे, जहाँ उन्हें ‘डिफेंस सर्विसेस स्टाफ’ कॉलेज के विद्यार्थियों और शिक्षकों को सम्बोधित करना था। जिनके साथ सशस्त्र बलकर्मी भी थे।
घटना का कारण अभी अज्ञात है। इतना अवश्य है कि जब आज (८ दिसम्बर) अपराह्न २ बजे के लगभग जब सेना का उपर्युक्त हेलीकॉप्टर कुन्नूर के घने जंगल से होकर गुज़र रहा था तभी वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसके कारण आस-पास के वृक्षों में आग लग गयी थी।
विचारणीय विषय है कि दुर्घटना घटने के तीन घण्टे-बाद देश की सरकार की ओर से दुर्घटना की सूचना दी गयी थी। सरकार इस मर्मान्तक दुर्घटना की सूचना तीन घण्टे तक क्यों छिपाये रही? इस प्रश्न का जवाब देश की जनता जानना चाहती है।
उल्लेखनीय है कि जनरल रावत १७ दिसम्बर, २०१६ से ३१ दिसम्बर, २०१९ ई० तक भारत-सेना के प्रमुख थे। ३१ दिसम्बर, २०१९ ई० को उन्हें प्रमुख रक्षा-अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था। जनरल रावत तीनों सेना की अत्याधुनिकीकरण की योजना को क्रियान्वित करने के दायित्व का निर्वहण कर रहे थे, ताकि सशस्त्र बल के मध्य समन्वय स्थापित किया जा सके और युद्धक क्षमता का विस्तार किया जा सके।
सैन्य-तन्त्र को इस अप्रत्याशित दुर्घटना की जाँच करने के बाद ‘दुर्घटना के कारण’ को पारदर्शी ढंग से देश के सामने प्रस्तुत करना होगा और देश की सरकार को निष्पक्ष तरीक़े से स्पष्टीकरण सार्वजनिक करना होगा।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ८ दिसम्बर, २०२१ ईसवी।)