हाइकु : मिट्टी

जगन्नाथ शुक्ल, इलाहाबाद-

* १*

मैं ही मिट्टी हूँ!
धरा की चहक हूँ!
सुरभित हूँ!

*२*

चाक की शान हूँ!
सोंधी सी महक हूँ!
मैं तिलक हूँ!

*३*

मैं करीब हूँ!
मौत में नसीब हूँ!
अवयव हूँ!

*४*

मैं सरल हूँ
मकान का ईंट हूँ!
मैं सहज हूँ!