जगन्नाथ शुक्ल, इलाहाबाद-
* १*
मैं ही मिट्टी हूँ!
धरा की चहक हूँ!
सुरभित हूँ!
*२*
चाक की शान हूँ!
सोंधी सी महक हूँ!
मैं तिलक हूँ!
*३*
मैं करीब हूँ!
मौत में नसीब हूँ!
अवयव हूँ!
*४*
मैं सरल हूँ
मकान का ईंट हूँ!
मैं सहज हूँ!
* १*
*२*
*३*
*४*