भगवत प्राप्ति व श्री राम भजन में सबसे बड़ा बाधक अभिमान

रामराज्य सत्ता की सिंहासन से नहीं वरन ऊंच नीच का भेदभाव मिटाने से आएगा, जितेंद्री जी महाराज

“भागवत कृपा प्राप्ति व श्री राम भजन में सबसे बड़ी बाधा मनुष्य का अभिमान  होता है।अहम (मैं) की भावना व्यक्ति को नेस्तनाबूद कर देती है। प्रकांड पंडित व शक्तिशाली होते हुए भी रावण का अहम( मैं ) ने अपने वंश में दीपक जलाने का भी अंश नहीं छोड़ा।”उक्त मानस अमृत कथा का रसपान कराते हुए मानस अमृत सेवा संस्थान के तत्वाधान में श्री राम जानकी मंदिर में चल रही श्री राम कथा के दूसरे दिन मानस मर्मज्ञ श्री जितेंद्री जी महाराज ने व्यक्त किए।
श्रीराम कथा के दूसरे दिन सोमवार को आचार्य जितेन्द्री जी महाराज ने कहा कि भगवद प्राप्ति, भजन में सबसे बड़ा बाधक अभिमान है। प्रभु प्राप्ति के लिए अभिमान शून्य होना चाहिये।अहंकार को दूर करने के लिये व्यक्ति को झुकना सीखना चाहिए। इसीलिये जो हमारी भातीय संस्कृति में झुककर प्रणाम करने की परंपरा है। वह अभिमान रहित हो जाता है। आचार्य जितेन्द्री जी महाराज ने कहा कि झुककर प्रणाम करने से चार चीजे बढ़ती है आयु, विद्या, यश और बल। उन्होंने कहा कि जिसके जीवन में झुकना आ गया, वही महान बनता है। भगवान भोलेनाथ देव नही महादेव है। फिर अपने आराध्य को झुककर प्रणाम करते है।
श्री महाराज ने सामाजिक व्यवस्था पर चोट करते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम क्षत्रिय वंश के होते हुए भी सभी जाति वर्गों को गले लगाया, कोई भेदभाव नहीं किया। राम राज्य सत्ता के सिंहासन से नहीं आएगा, बल्कि  समाज में ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त कर, हम सभी मिलकर ,जाति वर्ग द्वेष से हटकर एकीकरण भाव से कार्य करें। उन्होंने कहा कि जीवन को सुखमय बनाने के लिये पश्चिमी सभ्यता को त्यागकर अपनी भारतीय परम्परा को अपने जीवन में उतारें। उन्होंने कहा कि अपनी सांस्कृतिक परंपरा  को ध्यान में ना रखकर  पश्चिमी सभ्यता की अंधी दौड़ में प्रवेश करते जा रहे हैं ना तो हम पूर्ण रूप से  आधुनिक हो पा रहे हैं और  न ही अपनी परंपराओं का  निर्वाहन ठीक प्रकार से कर पा रहे हैं। पश्चिमी सभ्यता के अंधानुकरण से  समाज  पतन की ओर जा रहा है।
अतः हम सभी मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की  मर्यादित आचरण को  अपने में समाहित कर  सुखद जीवन व्यतीत कर सकते हैं ।मानस मर्मज्ञ ने  शिव पार्वती के  सुंदर विवाह का  चरित्रांकन कर बताया कि उद्देश्य की प्राप्ति  के लिए त्याग व संघर्ष की  आवश्यकता होती है। मां  पार्वती जी ने काल युगों तक को भगवान की प्राप्ति के लिए त्याग ,साधना और संघर्ष किया। व्यक्ति भी  एक परम कल्याणकारी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए लगन पूर्वक संघर्ष करते हुए सफलता प्राप्त कर सकता है ।कथा से पूर्व मुकेश रचना गुप्ता व राजू साईं गीता गुप्ता,सौरभ गुप्ता बूंदी वाले और सौरभ गुप्ता बताशा वाले ने व्यास पूजन किया। आचार्यगण ज्ञान शुक्ल और श्याम मिश्रा सम्मिलित रहे | कथा 24 सितंबर तक शाम पांच बजे से रात नौ बजे तक होगी।आचार्य श्री ने बताया कि कल 18  सितंबर दिन मंगलवार को  राम जन्मोत्सव  की कथा  का रसपान भक्तजनों को  कराया जाएगा।