बाढ़ से लाखों भारतीय नागरिक तबाह! सभी राजनीतिक दल संवेदनहीन?

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-

इन दिनों देश के अधिकतर राज्यों में आवृष्टि (बाढ़) से जड़-चेतन गम्भीरावस्था में हैं। केन्द्र-राज्य की सरकारों के मठाधीश निष्क्रिय दिख रहे हैं; वहीं विपक्षी दलों के ठीकेदारों की भी ज़बान पर ताले लटके हुए हैं।

उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान, असोम, महाराष्ट्र, ओडीशा, बिहार आदिक २१ राज्य जल-प्लावन से भीषण रूप में प्रभावित हैं। जल-प्रकोप के कारण शताधिक लोग और पशु मृत्यु को प्राप्त हो गये हैं। उनकी चल-अचल सम्पत्ति बाढ़ की भेंट चढ़ चुकी है; परन्तु अभी तक देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमन्त्री, गृहमन्त्री, प्रमुख विपक्षी दल के नेता आदिक बाढ़ के कारण चारों तरफ़ से घिरी देश की जनता के प्रति संवेदनहीन दिख रहे हैं। त्वरित ट्वीट करने में दक्ष प्रधानमन्त्री ने यह सिद्ध कर दिया है कि जिस ट्वीट को करने से उनका क़द बड़ा दिखायी देगा, उसी विषय पर वे ट्वीट करेंगे।

बाढ़ग्रस्त राज्यों के मुख्यमन्त्रियों और वहाँ के विपक्षी दलों के मुखिया को जन-जीवन को अपेक्षित और वांछित सहायता पहुँचाने की चिन्ता नहीं है।

पिछले लोकसभा-चुनाव में नरेन्द्र मोदी ने प्रत्येक राज्य में जा-जाकर मतदाताओं को सम्बोधित करते हुए कहा था :– आप लोग ‘नरेन्द्र मोदी’ के नाम पर भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान करें, शेष मुझ पर छोड़ दीजिए।

नरेन्द्र मोदी! बाढ़ की विनाशलीला के किरदार बन रहे लोग जीवन-मृत्यु के साथ संघर्ष कर रहे हैं और “मोदी-मोदी” के आर्त स्वर में प्राणरक्षणार्थ पुकार लगा रहे हैं; क्योंकि आपके कहने पर प्रभावित मतदाताओं ने ‘नरेन्द्र मोदी’ के नाम पर जिन अयोग्य, अपराधी तथा काहिल-जाहिल प्रत्याशियों को सांसद बनाया है, वे अपने संसदीय क्षेत्र के पीड़ितों से दूरी बनाये हुए हैं। ऐसे में, आपका कर्त्तव्य क्या बनता है, आप स्वयं तय कीजिए।

(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ५ अगस्त, २०१९ ईसवी)