आचार्य पण्डित पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

◆ साग्रह अनुरोध–
आप सभी इस टिप्पणी मे से किसी भी प्रकार की सकारण अशुद्धि/अशुद्धियाँ निकालें और मेरा मार्गदर्शन करें।
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आत्मीय विद्यार्थिवृन्द!
किसी भी स्तर की परीक्षा के हिन्दीभाषा/हिन्दी-भाषा (‘हिन्दी भाषा’ अशुद्ध है।) /सामान्य हिन्दी और हिन्दीसाहित्य/ हिन्दी-साहित्य (‘हिन्दी साहित्य’ अशुद्ध है।) के प्रश्नपत्र, परीक्षा सम्पन्न होने के पश्चात्, आप लोग मेरे पास (मेरी ह्वाट्सऐप्पसंख्या : ९९१९०२३८७०) भेजें।

मैने देश मे आयोजित समस्त परीक्षाओं के उक्त प्रश्नपत्रों (‘प्रश्न पत्रों’ अशुद्ध है।) की ताथ्यिक और भाषिक अशुद्धियों को सार्वजनिक करने का निर्णय किया (‘निर्णय लिया’ अशुद्ध है।) है, विशेषत: सम्बन्धित प्रतियोगितात्मक और विश्वविद्यालयीय (‘विश्वविद्यालीय’ अशुद्ध है।) परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों की, ताकि सम्बन्धित संस्थानों के आधिकारिक लोग को (‘लोगों को’ अनुपयुक्त शब्द है; क्योंकि बहुवचन का पुन: बहुवचन नहीं बनाया जा सकता है।) ‘लज्जा’ का अनुभव हो सके तथा वे भविष्य के लिए जागरूक (‘जागरुक’ अशुद्ध है।) और सजग हो सकें।

हमारे विद्यार्थी एक-दो अंकों से पिछड़ने के कारण अपनी उद्देश्यप्राप्ति/उद्देश्य-प्राप्ति/उद्देश्य की प्राप्ति (‘अपने उद्देश्य प्राप्ति’, ‘अपने उद्देश्यप्राप्ति’ अशुद्ध हैं; क्योंकि ‘उद्देश्य’ के साथ जुड़ा ‘प्राप्ति’ शब्द स्त्रीलिंग है।) से वंचित किये जाते रहे हैं (‘हो जाते रहे हैं’ अशुद्ध है।)। इन्हीं विसंगतियों के कारण उनसे सम्बन्धित प्रकरण वर्षों से न्यायालय मे न्याय पाने की आस मे विलम्बित हैं।

★ प्रश्नपत्रों के साथ परीक्षा करानेवाले संस्थान, स्थान और परीक्षा का नाम-वर्ष, परीक्षातिथि-वर्ष तथा विषय का/ के नाम अवश्य भेजें।