बेटियोँ को क्रय-विक्रय की ‘वस्तु’ मत समझो

धिक्कार है, उन माँ-बाप को, जो अपनी बेटियोँ को ‘वस्तु’ समझकर तथाकथित साधुओँ को दान करते आ रहे हैँ। नीचे चित्र मे दिख रही बालिका आगरा की है, जिसका नाम राखी है। इस लड़की के लोभी माँ-बाप ने इसे १३ वर्ष की अवस्था मे जूना अखाड़े के महन्त कौशल गिरि को सौँप दिया था और उस कथित साधु ने राखी नामक उस अवयस्क लड़की का एक अलग ही नामकरण कर, साध्वी वेशभूषा धारण कराकर अपने पास रख लिया था, जिसकी विश्वस्तर पर निन्दा शुरू हो गयी थी; उसका प्रभाव यह हुआ कि जूना अखाड़े के महन्त कौशल गिरि को इस कुकृत्य के अपराध मे सात वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया गया है।

समाज को सजग रहना होगा। अब इस तथ्य की भी जाँच करायी जानी चाहिए कि वह लड़की निष्कासित महन्त कौशल गिरि तक कैसे पहुँची थी? उसमे उसके माँ-बाप की कौनसी विवशता और बाध्यता थी?

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १२ जनवरी, २०२५ ईसवी।)