•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
मेरे लिए अतिशय गर्व और गौरव का विषय है कि जिस शिक्षण-संस्थान से मैने स्नातक की उपाधि अर्जित की थी; जहाँकी समस्त साहित्यिक, बौद्धिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधियोँ का संचालन करता था तथा जहाँ छात्र-सम्पादक के रूप मे लगातार वहाँ से प्रकाशित वार्षिक पत्रिका ‘मनीषा’ के लिए रचनाओँ और अन्य सामग्री के आमन्त्रण और चयन करने का दायित्व-निर्वहण करता था, उस शिक्षामन्दिर मे आयोजित की जाने वाली त्रिदिवसीय (१६ सितम्बर से १८ सितम्बर तक) भाषिक कर्मशाला मे मुझे निमन्त्रित किया गया है।
उल्लेख्य है कि उस आयोजन मे ‘हिन्दी-वर्तनी एवं प्रूफ़शोधन’ विषय पर मेरी कर्मशाला गतिशील रहेगी। मुझे ‘गुरुऋण’ का भुगतान करने का पुनीत अवसर वहाँ के हिन्दी-विभाग की ओर से प्रदान किया गया है। मै सम्बन्धित आयोजन-समिति के समस्त पदाधिकारियोँ के प्रति नमित हूँ।