‘मुक्त मीडिया’ का ‘आज’ का सम्पादकीय
— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय :
कल (६ जून) से पाकिस्तान की अन्दरूनी राजनीति में उबाल आ गया है। दशकों से पाकिस्तान के प्रभुतासम्पन्न राजनेताओं के साथ अपने सम्बन्ध-व्यापार को फैलाने में माहिर एक सुन्दरी ने लगभग नौ वर्षों-बाद एक ऐसा ट्वीट किया है कि पाकिस्तान की राजनीति की बेहयाई जगज़ाहिर हो चुकी है।

उल्लेखनीय है कि उस रूपसी ने आरोप मढ़ा है कि यूसुफ़ रज़ा गिलानी के प्रधानमन्त्रित्वकाल में वर्ष २०११ में पाकिस्तान के तत्कालीन गृहमन्त्री रहमान मलिक ने उस महिला के साथ इस्लामाबाद-स्थित राष्ट्रपतिभवन में शरबत में मादक पदार्थ मिलाकर बेहोश करके बलपूर्वक शारीरिक दुष्कर्म किया था। उस महिला का यह भी आरोप है कि उस समय प्रधानमन्त्री गिलानी भी मौजूद थे, जिन्होंने उसके साथ दुर्व्यवहार किया था।

अब उस महिला को समझिए। वह महिला संयुक्त राज्य अमेरिका की है, जो एक पत्रकार और ब्लॉगर है और वर्तमान में वहाँ के प्रधानमन्त्री इमरान ख़ान की ‘सोसल मीडिया टीम’ की सक्रिय सदस्या है। उसका नाम ‘सिन्थिया डी रिची’ है। कथित घटना के समय वह राष्ट्रपतिभवन में ही रहती थी, तब वह सत्ताधारी पार्टी ‘पाकिस्तान पीपल्स पार्टी’ के लिए काम करती थी।
वह महिला अति महत्त्वाकांक्षी भी बतायी जा रही है। सिन्थिया डी रिची का कहना है कि उसे घटना के दिन राष्ट्रपतिभवन में किसी कार्यक्रम में भागीदारी के लिए बुलाया गया था; परन्तु जब वह वहाँ पहुँची थी तब उसका शारीरिक शोषण किया गया था। रिची का यह भी कहना है कि उक्त घटना के साक्ष्य उसके पास हैं, जिन्हें समय आने पर वह प्रस्तुत करेगी। संयुक्त राज्य अमेरिका की उस ब्लॉगर पत्रकार ने इस्लामाबाद-स्थित संयुक्त राज्य अमेरिकी दूतावास में भी शिकायत की है, जिसे दूतावास ने गम्भीरता से नहीं ली है।
उक्त समस्त तथ्यों की रौशनी में कथित सुन्दरी पत्रकार के आरोप पर मुहर नहीं लगायी जा सकती; क्योंकि उसके अब भी कई प्रभावशाली राजनेताओं के साथ सम्बन्ध हैं और वह अति अवसरवादी महिला है।
शारीरिक सम्बन्ध भी अनेक प्रकार के होते हैं और ऐसी महिलाओं के सम्बन्ध रज़ामन्दी से होते हैं, न कि बल और छलपूर्वक। ऐसा इसलिए भी कि अतिरिक्त महत्त्वाकांक्षा पालनेवाली अधिकतर महिलाएँ यह मानकर चलती हैं कि वे अपनी महत्त्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए किसी भी हद तक जायेंगी।
बहरहाल, संयुक्त राज्य अमेरिकी सुन्दरी ने अपने तरकश से तीर छोड़कर पाकिस्तान की राजनीति में एक प्रकार की गर्मी पैदा कर दी है। अब तेल देखना है और तेल की धार भी देखनी है।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ७ जून, २०२० ईसवी)