प्रतिनव मिश्र :

मानसिक विकार भारत और तमाम दुनिया में एक ऐसी समस्या है जिस पर लोग बात नहीं करना चाहते हैं। हम और आप अपने आसपास और समाज में तमाम मानसिक रोगों से पीड़ित व्यक्तियों को देखते है और उनके बारे में एक धारणा बना लेते है, पर हकीकत तो यह है की मानसिक रोगी भी शारीरिक रोगियों की तरह एक मजबूर और पीड़ित व्यक्ति है जिसको हमारे और आपके सहारे और प्यार की जरूरत है। आज हम इस लेख में मानसिक विकारों के कारण और इलाज की चर्चा करेंगे और यह भी समझने की कोशिश करेंगे की मानसिक विकार समाज मे अभिशाप की दृष्टि से क्यों देखा जाता है
मानसिक विकार क्यूँ होता है-:
मानसिक विकारों के प्रमुख कारणों में अनुवांशिक,मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक कारण प्रमुख हैं। इसके अलावा अत्याधिक नशे का सेवन,कोई शारीरिक चोट या फिर कोई बहुत बड़ा हृदयाघात भी अक्सर मानसिक विकार का कारण बनता है। मनोवैज्ञानिक कारणों में अक्सर घर या कार्यक्षेत्र में होने वाला तनाव,शिक्षा में असफलता,रिश्तो में तनाव,धन की कमी एवं सामाजिक अकेलापन भी प्रमुख कारणों में से है। अनुवांशिक कारणों में कई बार हमें माता पिता के जीन से हमे यह बीमारी जन्मजात मिलती है।
मानसिक विकारों के लक्षण-:
- चिड़चिड़ापन होना मानसिक विकार होने का एक प्रमुख लक्षण है, व्यक्ति हर समय तनाव में ही रहता है।
- अवसाद ग्रस्त रहना भी मानसिक विकार का एक लक्षण है,व्यक्ति सदैव नकारात्मक विचारों से घिरा रहता है और कई बार उसके मन में आत्महत्या करने के विचार भी आते हैं।
- खानपान की व्यवस्था बिगड़ना,नींद ना आना भी मानसिक विकारों से ग्रसित होने के लक्षण है।
- मानसिक विकारों का स्तर अधिक बढ़ने पर मनुष्य में तमाम तरह के भ्रम होने लगते हैं और उसे लगता है कि यह कोई भूत प्रेत और आत्मा का साया है।
मानसिक विकार कुछ अनसुने तथ्य-:
- भारत में प्रतिवर्ष एक करोड़ से अधिक मानसिक विकारों के मामले सामने आते हैं।
- साढ़े चार करोड़ से अधिक अमेरिकन मानसिक विकारों से पीड़ित है।
- अमेरिका जैसे विकसित देश में भी आधे से अधिक मानसिक विकार से पीड़ित लोगों को मानसिक चिकित्सा एवं सहायता नहीं मिल पाती है।
- समलैंगिकों मैं सामान्य व्यक्तियों की अपेक्षा 3 गुना अधिक मानसिक विकारों से पीड़ित होने की संभावना होती है
- आधे से अधिक मानसिक विकार से पीड़ित व्यक्तियों में 14 वर्ष से पूर्व ही लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं।
इलाज और रोकथाम-:
मानसिक विकारों का कोई बहुत पक्का इलाज मौजूद नहीं है दवाइयों के नाम पर कुछ नींद की गोलियां और कुछ दिमाग को शांत रखने यह दवाइयां ही मौजूद है मगर यह दवाइयां भी बिमारी का इलाज ना करके केवल कुछ समय की राहत ही देती हैं साथ ही थेरेपी और मनोवैज्ञानिक स्तर पर कुछ मनोचिकित्सक इसका इलाज करते हैं रोकथाम के स्तर पर हमें मरीज को पूरा प्यार देना चाहिए हमें यह समझना चाहिए कि वह स्वयं पीड़ित है तो वह कुछ भी जानबूझकर नहीं कर रहा तो हमें हर स्तर पर उसे प्यार और समर्थन देने के जरूरत है।
निष्कर्ष-:
भारत जैसे तमाम तीसरी दुनिया के देशों में आज भी मानसिक विकार को बुरी नजर से देखा जाता है और मानसिक विक्षिप्त मरीज को भूत प्रेत और ऊपरी बाधाएं, बुरी आत्माएं मानकर कर उसको तमाम यातनाएं दी जाती है जबकि जरूरत तो इस बात की है कि उस व्यक्ति को संपूर्ण चिकित्सीय उपचार मिले अगर हम अमेरिका जैसे विकसित देशों की बात करें तो हम पाते हैं कि मानसिक विकारों को लेकर अमेरिका और यूरोप के कई विकसित देश अभी भी उहापोह की स्थिति में है। सरकारे भी इस दिशा में अभी कुछ बहुत अधिक काम नहीं कर पा रही है हालांकि सरकारों के प्रयास जारी है मगर मानसिक विकारों से असली युद्ध तो हम सभी को अपने आसपास और समाज से लड़कर ही शुरु करना होगा तभी मानसिक विकार रूपी दानव को हम सभी मिलकर हरा पाएंगे।