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आज बड़े मंगल के साथ सावित्री व्रत को बताया जा रहा खास

 लखनऊ– ज्येष्ठ मास का तीसरा बड़ा मंगल श्रद्धालुओं के लिए खास है। जहा एक ओर मंदिरों में बजरंग बली के जयकारों की गूंज सुनाई देगी। वहीं, दूसरी ओर दिन में व्रती महिलाएं सुहाग की कुशलता के लिए बरगद की परिक्रमा कर रही हैं। शनि जयंती के चलते शनि मंदिर भी जयकारों से गुंजायमान होंगे। तीसरे बड़े मंगल पर अन्य दिनों के मुकाबले शहर में अधिक भंडारे होंगे। अलीगंज के नये-पुराने हनुमान मंदिर और हनुमान सेतु समेत अन्य मंदिरों में सुबह से श्रद्धालुओं की कतारें लगेंगी। साथ ही कई जगहों पर भंडारे लगेंगे। हनुमान सेतु मंदिर का मुख्य द्वार दिनभर बंद रहेगा। बीरबल साहनी मार्ग की ओर से श्रद्धालुओं को बजरंगी के दर्शन होंगे। पक्कापुल स्थित दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर के पुजारी श्रीराम के सानिध्य में सुंदरकाड पाठ होगा। लेटे हनुमान मंदिर के पास सुनील गोम्बर की ओर से भंडारा होगा। तालकटोरा के बालाजी हनुमान मंदिर के महंत रमेश द्विवेदी व डीएन अवस्थी की ओर से बालाजी का विशेष श्रृंगार किया जाएगा।
सुहाग की कामना के लिए परिक्रमा इस बार बड़े मंगल को पड़ रहा वट सावित्री व्रत खास माना जा रहा है। पति को भगवान का दर्जा देने वाली सुहागिनों के लिए इस बार व्रत करने से विशेष पुण्य मिलेगा। सोलह श्रृंगार किए महिलाएं 108 बार कच्चे धागे को नंगे पैर वट वृक्ष की परिक्रमा करेगी। ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि पति की दीर्घायु और अखंड मंगलकामना के लिए यह पर्व खास है। आटे के बरगद, पापड़, पूड़ी, हलवे और मौसमी फलों समेत खरबूजों का भोग लगाकर पूजन करना चाहिए। वामन पुराण के अनुसार भगवान विष्णु की नाभि से जब कमल प्रकट हुआ, तब यक्षों के राजा मणिभद्र से वट का वृक्ष उत्पन्न हुआ था। ऐसे में इसे यक्षवास व यक्षतरु भी कहा जाता है। त्रिग्रही योग से खास होगी शनि जयंती ग्रह गोचर की गणना के अनुसार, शनि जयंती की इस अमावस्या पर त्रिग्रही योग श्रद्धालु को विशेष फल देने वाली होगी। आचार्य विजय वर्मा ने बताया कि सूर्य, चंद्र व बुध का मेष राशि में त्रिग्रही युति योग रहेगा। मेष राशि का स्वामी मंगल होने की वजह से इस राशि वालों को विशेष लाभ होगा। हनुमान जी और शनि देव की साथ में आराधना करने से विशेष फल की प्राप्ति होगी। हालाकि तीन ग्रहों के संयोग से प्राकृतिक आपदाओं की संभावना जरूर रहेगी।