बिहारी होना कउनो अपराध है का

बिहारियों के साथ ज्यादा दोस्ती रखने का नुकसान यह है कि आप ‘सिर’ को ‘माथा’ और ‘सड़क’ को ‘सरक’ बोलने लगते हैं। फायदा यह है कि दही चूड़ा और लिट्टी-चोखा जैसे नए व्यंजनों से परिचित हो जाते हैं।

दही चूड़ा और लिट्टी चोखा की खास बात यह है कि एक बार जिसको इसका स्वाद लग गया फिर वह इसे खाए बिना नहीं रह सकता है। अब दही चूड़ा तो बनाना आसान है । चूड़ा को भिगोया, दही डाला और खा लिया। लेकिन लिट्टी-चोखा के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है।

परसों दिल्ली में बारिश हुई और लिट्टी-चोखा खाने का मन किया तो मैं गोविंदपुरी मेट्रो स्टेशन के पास एक परिचित सनातनी दुकान पर लिट्टी चोखा खाने पहुंच गया। लिट्टी-चोखा वास्तव में स्वादिष्ट था। मैं दुकानदार की तारीफ करने ही वाला था कि तभी एक नया ग्राहक आ गया।
नया ग्राहक:- ई लिट्टी-चोखा कैसन दिया?
दुकानदार :- देसी घी के साथ एक प्लेट ₹40 का बटर के साथ ₹30 का ।
ग्राहक- कलजुग में देसी घी कौन लगाता है? सब डालडा इस्तेमाल करता है।

दुकानदार:- नहीं ,नहीं।
हम मदर डेयरी का ओरिजिनल घी लगाते हैं । यह देखो मदर डेयरी का डिब्बा ।

ग्राहक:- धौ मरदे! ई सब डिब्बा-उब्बा हम बहुत देखे हैं । सब नकली होता है । हमको बटर वाला दीजिए।

दुकानदार:- ठीक है ₹30 का पड़ेगा।

ग्राहक:- एथी रुकिए!! ऐसन करिए। एगो प्लेट बिना बटर लगाए दे दीजिए। ऊ कितने का पड़ेगा?
दुकानदार:- ₹25 का पड़ेगा ।

ग्राहक :- रुकिए महाराज। इसमें —— ——– —

दुकानदार: दिल्ली में नए आए लगते हो? पक्के वाले बिहारी हो?

ग्राहक:- हां, तो?
बिहारी होना कउनो अपराध है का?
लेकिन तुमको कैसे बुझाया?

दुकानदार:- तुम जो इतना बतकुचरी और मोल भाव किये न, उससे हमको बुझाया।

मैं (दुकानदार से):- तुम भी तो बिहारी हो। फिर इसके बिहारी होने पर तुम्हें इतना आपत्ति क्यों है?

दुकानदार:- हां, मैं भी बिहारी हूं। लेकिन उसमें और हममें बहुत फर्क है।

मैं:- क्या अंतर है तुम दोनों बिहारियों में ?

दुकानदार:- इसके जैसे लोग खलिहर हैं। बतकुचरी खूब करेगा, 10 का सामान खरीदेगा, 20 मिनट समय बर्बाद करेगा।
मैं सुबह दूध बांटता हूँ। दोपहर भर दुकान की तैयारी करता हूँ और शाम को लिट्टी-चोखा का दुकान लगाता हूँ। करता ज्यादा हूं, बोलता कम हूं।

“मैं दिल्ली वाला बिहारी हूँ, वो बिहार वाला बिहारी है।”

मैं : एक तो तुम सनातनी बिहारी, ऊपर से मेहनती, तीसरे लिट्टी-चोखा भी मस्त बनाते हो। इसलिए तुम्हारे साथ एक सेल्फी तो बनती है।

(आशा विनय सिंह बैस)
बिहारियों के परम मित्र