सवैया छंद संग्रह “छगन छंद सवैया” की समीक्षा

कृति:- छगन छन्द सवैया (सवैया छन्द संग्रह)
रचनाकार:- डॉ.छगनलाल गर्ग “विज्ञ”
प्रकाशक:- उत्कर्ष प्रकाशन,
मेरठ केंट
प्रथम संस्करण:- 2021
मूल्य:- 250 रुपये
पृष्ठ-112

प्रस्तुत कृति छगन छन्द सवैया ग्राम जीरावल जिला सिरोही राजस्थान के निवासी सेवानिवृत प्राचार्य छंद विशेषज्ञ वरिष्ठ कवि एवम साहित्यकार डॉ.छगनलाल गर्ग विज्ञ की रचनाओं का उत्कृष्ट काव्य संकलन है। विद्या वाचस्पति मानद उपाधि सम्मानित विभिन्न राष्ट्रीय मंचों से 200 से अधिक सम्मान प्राप्त आप ऐसे रचनाकार हैं जिन्हें छंद लिखने में महारथ हासिल है आपकी अब तक सात कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी है। आप वर्तमान में बाल स्वास्थ्य एवं निर्धन दलित बालिकाओं को शिक्षा सम्बन्धी सेवा कार्य कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर की पत्र पत्रिकाओं व समाचार पत्रों में आपके आलेख काव्य रचनाएँ प्रकाशित होती रहती है।

छगन छंद सवैया कृति मे आपने सवैया के विभिन्न प्रकारों जैसे दुर्मिळ सवैया, मतगयंद सवैया, गंगोदक सवैया, मानिनी सवैया, महाभुजंगप्रयात सवैया, सुखी सवैया, अरविंद सवैया, अरसात सवैया, किरीट सवैया, सुमुखी सवैया, मदिरा सवैया, वाम सवैया, मुक्तहरा सवैया में गुरु भक्ति सत्य स्कल्प प्राचीन संस्कृति के बारे में अपनी बात कही है। इस कृति में अहिंसक बनने निष्ठा के साथ अच्छे कार्य करने करुणा दया का भाव रखने। अहंकार का त्यांग कर लोक कल्याण के कार्य करने का सन्देश देती है।

इस कृति में बताया है कि गुरु शिष्य का सम्बंध कैसा होना चाहिए कवि डॉ. छगनलाल गर्ग विज्ञ जी लिखते हैं उनका इस कृति को लिखने के पीछे क्या उद्देश्य है-काव्य में अभिव्यक्ति सौंदर्य सवैया छंद में प्रकाशित करने के पीछे इच्छा है कि रसानुभूति शब्द सौन्दर्य भाव सौन्दर्य और गेयता को काव्य जगत में उजागर कर रीति और भक्तिकाल के बाद से मृत प्रायः इस छंद की पुनः प्रतिष्ठा करना है। उनका दूसरा उद्देश्य -काव्य के भाव जगत की उच्चतम दशा से साक्षात्कार कर अद्वेत दर्शन कस उद्घाटन करना है।

विज्ञ जी के ये सवैया छंद उत्कृष्ट होने के साथ ही जीवन जीने की कला सिखाते हैं। अर्वाचीन में नैतिक मूल्यों का पतन होता जा रहा है। इन छंदों के माध्यम से हम सरल बोधगम्य सहज भाषा मे गेयात्मक रसात्मक रूप से परिपूर्ण इस काव्य कृति से समाज को कल्याण के पथ पर चलाकर स्वस्थ समृद्ध देश का निर्माण कर सकते हैं।
सवैया छंद चार चरणों मे लिखा एक समपाद वर्ण छन्द है। वार्णिक वृत्तों में 22 से 26 अक्षर होते हैं। इस प्रकार के जाति छंदों को हिन्दी मे सवैया छन्द कहते हैं।

जलसंकट पर आधारित सवैया छन्द में आपने बताया कि जल की कमी होने से सारे जल स्रोत सूख गए हैं। नदियों का बहना कलकल करना बंद हो गया है। अति दोहन होने से प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया है ।

आप लिखते हैं:-
तकदीर बनी जलधार यहां कुछ बूंद बची अवशेष धरा।
जल संकट आन पड़ा जग में तल रीत गया अब सोच जरा।
अति दोहन से बिगड़ी वसुधा मिटती नदियां जल स्रोत मरा।
नल नीर नहीं बहता अब तक हर घूँट सदैव अतृप्त भरा।
माँ अपनी संतान के लिए कितना त्याग करती है रात दिन जाग जाग कर संतान की हर विपदा को टाल देती है।

जगती प्रति आहट रात जगे बस ध्यान रहे चित बालक में
मल त्याग करे तब साफ रहे दुनिया बसती शिशु नायक में ।
हँसती अँखियाँ छवि देख प्रभा नव गीत उठे रस मादक में।
जननी अवनी सम बोझिल है प्रभुता निखरे जनु साधक में।

प्रकृति प्रेमी विज्ञ जी ऋतुराज बसंत का वर्णन करते हुए बताते हैं कि बसंत में कोयल मीठे गीत गाती है कूकती है। कलियां खिल जाती है। चहुँ ओर महक फैल जाती है।
वे कहते हैं-
कोयल कूक रही अति मादक प्रेम झरे रस घोल सवेरे।
आह बसंत विहार रहा उर नैन खुली कलियां मधु घेरे।
फूल सदा मकरंद भरे चित पावन अंचल गन्ध घनेरे। नेह अलौकिक रश्मि सुशोभित प्राण चहे गुरु चेतन मेरे।
प्रस्तुत कृति में शब्द चयन देखते ही बनता है।सरल शब्दों में सुन्दर अभिव्यक्ति की गई है। नवोदित रचनाकारो के लिए यह काव्य संकलन बहुत उपयोगी है। अद्वितीय अद्भुत सवैया छन्द संग्रह प्रेरणास्पद लगा।

आज की दौड़ती भागती जिंदगी में यह कृति पढ़ने मात्र से सांसारिक मोह बंधन को छोड़कर सत्य का मार्ग प्रशस्त करती है। साहित्य जगत में छगन छन्द सवैया अलग पहचान बनाएगी ऐसी रचनाकार को बधाई देता हूँ।

प्रस्तुत कृति विज्ञ साहब ने अपने दोनों सुपुत्रों को समर्पित की है दिनेश गर्ग व महेंद्र गर्ग को।कृति में साहित्य संगम संस्थान नई दिल्ली के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवीर सिंह मन्त्र मीना भट्ट पूर्व न्यायाधीश लोकायुक्त जबलपुर छन्द गुरु शैलेन्द्र खरे सोम सम्पादक माध्यम रामकृष्ण विनायक सम्पादक युगधारा पत्रिका सौम्या मिश्रा के शुभकामना सन्देश इस सवैया संग्रह के सार को बताने में सक्षम लगे। कृति का मुखावरण विज्ञ साहब की अनवरत साहित्य लेखन साधना को दर्शाता बहुत सुंदर छवि से परिपूर्ण लगा।

–डॉ० राजेश कुमार शर्मा पुरोहित
कवि/साहित्यकार/समीक्षक
भवानीमंडी, झालावाड़