कोथावाँ प्रा०वि० का हाल, बच्चों को दूध और फल नहीं दे रहे जिम्मेदार

हिन्दी को राष्ट्रभाषा का संवैधानिक अधिकार कब मिलेगा?


संविधान-दिवस पर ‘सर्जनपीठ’ का आयोजन

संविधान-दिवस के अवसर पर ‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज की ओर से ‘हिन्दी को राष्ट्रभाषा का संवैधानिक अधिकार कब मिलेगा?’ विषयक एक आन्तर्जालिक राष्ट्रीय बौद्धिक परिसंवाद का आयोजन किया गया, जिसमें देश के अनेक प्रबुद्धजन ने अपने विचार व्यक्त किये थे।

अधिवक्ता श्यामसुन्दर शर्मा (मेरठ) ने कहा, “हमारे न्यायालयों में हिन्दी में विवादों की सुनवाई और उन पर आदेश तथा निर्णय करने को अनिवार्य बनाया जाये।”

चिकित्सक डॉ० हेम चौधरी (दतिया) ने कहा, “सरकारों की इच्छाशक्ति मर चुकी है और वे राजनीति को ही प्रधानता देकर हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने में बाधक सिद्ध हो रहे हैं।”

संयोजक आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का मत है, “हम हिन्दीभाषाभाषी साहित्यकार, लेखक, अध्यापक आदिक यदि अहिन्दीभाषाभाषी क्षेत्रों में जाकर भाषिक आदान-प्रदान कर एक-दूसरे की सारस्वत सम्पदा में श्रीवृद्धि करने के लिए योजनाएँ बनायें और उन्हें क्रियान्वित करें तो एक प्रभावकारी जनमत सामने आयेगा, जिससे कि केन्द्र और राज्य की सरकारें उनके मत का समादर करती दिखेंगी और हिन्दी की सर्वत्र संवैधानिक मान्यता भी।”