कछौना (हरदोई)। तमिलनाडु के कुन्नूर में सैन्य हेलिकॉप्टर दुर्घटना में दिवंगत देश के प्रथम चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन लक्ष्मण सिंह रावत व उनकी पत्नी मधुलिका रावत सहित 11 अन्य शहीद जवानों को गुरुवार को हरदोई प्रेस क्लब की कछौना इकाई व ग्रामीण सेवा फाउंडेशन द्वारा भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कछौना प्रेस क्लब (सेंगऱ जनसेवा केंद्र) के कार्यालय पर आयोजित श्रद्धांजलि-सभा में पत्रकारों, नगर पंचायत कछौना पतसेनी के सभासदों व स्थानीय नागरिकों द्वारा दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत सीडीएस बिपिन रावत की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। दुर्घटना में एकमात्र जीवित सैनिक की जीवन रक्षा हेतु प्रार्थना भी की गई।
बताते चलें कि बुधवार को सीडीएस बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत व 12 अन्य लोगों को लेकर जा रहा वायुसेना का अत्याधुनिक व एडवांस तकनीक से लैस Mi-सीरीज का हैलीकॉप्टर तमिलनाडु के कुन्नूर में अज्ञात कारणों के चलते दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। दिल दहला देने वाली इस दुर्घटना में देश ने एक महान योद्धा के साथ साथ कई वीर सपूतों ने खो दिया था। आठ दिसंबर का दिन देश के लिए एक मनहूस दिन साबित हुआ।इस अप्रत्याशित घटना से हर भारतीय मर्माहत है।
आयोजित श्रद्धांजलि सभा में शिक्षक योगेश कुमार सिंह ने भावुक क्षणों में दिवंगत सीडीएस जनरल बिपिन रावत की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सीडीएस रावत का जन्म 16 मार्च 1958 को उत्तराखंड के पौढ़ी गढ़वाल जिले में एक राजपूत परिवार में हुआ था। इनके पिता लक्ष्मण सिंह रावत भी सेना से लेफ्टिनेंट जनरल पद से रिटायर हुए थे। परिवार में अब दो बेटियाँ कृतिका और तारणी हैं। सीडीएस बिपिन लक्ष्मण सिंह रावत का पूरा परिवार कई पीढ़ियों से भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहा है। रावत लगभग 20 वर्ष की उम्र में दिसंबर 1978 में भारतीय सेना में शामिल हुए थे तब उन्हें देहरादून से 11 गोरखा राइफल्स की पांचवीं बटालियन में नियुक्त किया गया था जहां उन्हें ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ भी दिया गया था।
वरिष्ठ पत्रकार पी.डी.गुप्ता ने बताया कि सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने 17 दिसंबर 2017 को जनरल दलबीर सिंह सुहाग के बाद भारतीय सेना(इंडियन आर्मी) के 27वें सेनाध्यक्ष के रूप में भारतीय सेना की कमान संभाली थी। इसके बाद उन्होंने 01 जनवरी 2020 को भारत के पहले रक्षा प्रमुख या चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) का पदभार ग्रहण किया था।उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक, उत्तम युद्ध सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, सेवा पदक आदि पुरूस्कारों से भी सम्मानित किया गया है।
पत्रकार व सोशल एक्टिविस्ट एस.बी.सिंह सेंगऱ ने बताया कि सीडीएस बिपिन रावत को उच्च ऊंचाई वाले युद्ध क्षेत्रों में जंग लड़ने और काउंटर इंसर्जेंसी ऑपरेशन यानी दुश्मनों के विरुद्ध तेज जवाबी कार्यवाई करने के एक्सपर्ट के तौर पर जाना जाता था।उनके पास आतंकरोधी अभियानों में कमान संभालने का 10 वर्षों का अनुभव था।सीडीएस बिपिन रावत की पत्नी मधुलिका रावत भी भारतीय सेना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही थीं, वो वर्तमान समय में ‘डिफेंस वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन (डी.डब्ल्यू.डब्ल्यू.ए.)’ की प्रेसिडेंट थीं जोकि भारतीय सैनिकों की पत्नी, बच्चों व उनपर निर्भर अन्य पारिवारिक सदस्यों के वेलफेयर(कल्याण) के लिए काम करने वाला देश का सबसे बड़ा एनजीओ है।नगर पंचायत कछौना पतसेनी के सभासद अभय सिंह ‘टिंकू’ ने बताया कि जनरल रावत एक बेहद जांबाज योद्धा रहे जिन्होंने सेना में सर्वोच्च पद तक का सफर पूरा किया।उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक व एयर स्ट्राइक जैसी उपलब्धियाँ अर्जित की।
कछौना के जानकी प्रसाद इंटर कॉलेज के प्रबंधक डॉ० शिवराज सिंह पटेल ने कहा कि सीडीएस बिपिन रावत का भारतीय सेना के आधुनिकीकरण व सेना में महिलाओं की एंट्री दिलाने में बड़ा योगदान है। आर्मी को प्रोफेशनल आर्मी बनाने का श्रेय जनरल रावत जी को ही जाता है।उनके पास सेना में काम करने का 43 वर्ष का अनुभव था।शिवमनिका मार्केट के ऑनर सोनू सिंह ने दिवंगत सीडीएस बिपिन रावत के कार्यों की सराहना करते हुए उनका इस तरह असमय जाना देश के लिए एक अपूर्णीय क्षति बताई।
श्रद्धांजलि सभा के इस अवसर पर पत्रकार अजय बाजपेयी, दीपक श्रीवास्तव, अनुज जायसवाल, मोनू सिंह व कछौना के सभासद रंजीत राव गौतम, हाजी जमील अहमद, अरविंद कुमार कुक्कू, मोहम्मद इरफान, राजेंद्र शर्मा ‘छोटे’, गोधन, पूर्व सभासद विकास विश्वकर्मा ‘गोल्डी’, व स्थानीय नागरिकों में राजकुमार, अंकुल गौतम, ओमप्रकाश, मोहम्मद याकूब, विजय गुप्ता आदि लोग उपस्थित रहे।