तीर्थराजप्रयाग-महाकुम्भक्षेत्र मे भीषण अग्निकाण्ड मे सैकड़ोँ शिविर जलकर राख हुए!

गत १९ जनवरी को महाकुम्भक्षेत्र मे कई गैस-सिलिण्डरोँ मे विस्फोट हुआ था। उस भीषण अग्निकाण्ड मे २०० से अधिक टेण्ट जलकर ख़ाक हुए हैँ। गीताप्रेस के १८० शिविर भी पूरी तरह से नष्ट हो चुके थे। पहले केवल २५ शिविरोँ के जलकर राख होने की सूचना दी गयी थी, जबकि कुल मिलाकर २०० से अधिक शिविर आग के हवाले हो चुके हैँ।

आग सेक्टर १९ मे लगी थी। जब हमने प्रभावित लोग से पूछा तब बताया गया था कि ‘भोजन’ पकाते समय सिलिण्डर मे विस्फोट हो गया था; परन्तु एक साथ कई सिलिण्डरोँ मे विस्फोट हो जाने की बात समझ मे नहीँ आती। कई लोग आग मे झुलसे भी हैँ; लोग मरे हैँ वा नहीँ, अज्ञात है; क्योँकि घटनास्थल पर किसी के जाने के लिए अनुमति नहीँ दी जा रही थी। बहुत देर-बाद आग की विकरालता पर नियन्त्रण पाया गया था।

यह भी बताया जा रहा है कि अपराह्न ४.३० के लगभग लगी आग मे शास्त्री पुल के समीपस्थ सेक्टर १९ के अन्तर्गत गीता प्रेस के १८० शिविर जलकर राख हो गये थे। अधिकारियोँ की बातोँ पर विश्वास करेँ तो बताया जा रहा है कि अपराह्ण ४ बजकर १० मिनट पर छोटे सिलिण्डर से ‘चाय’ पकाते समय सिलिण्डर के लीक हो जाने से आग लग गयी, जिसकी चपेट मे दो सिलिण्डरोँ के आ जाने से उनमे विस्फोट हो गया था, जबकि गीता प्रेस के सूत्र बताते हैँ कि आग बाहर से लगी है, गैस-सिलिण्डर से कोई लेना-देना नहीँ। आग बुझाने के लिए १२ अग्निशमन वाहन लगाये गये थे।

अधिकारियोँ के अनुसार, एक घण्टे मे आग पर नियन्त्रण पा लिया गया था। यह भी बताया जा रहा है कि उस अग्निकाण्ड मे किसी संत के एक लाख रुपये की धनराशि भी जल गयी थी। उस अग्निकाण्ड से लगभग ५०० लोग को बचाये जाने की भी ख़बर है। उस घटना की वास्तविक जाँच कराने पर जब मैने एक अधिकारी से प्रश्न किया था तब उसने अपना नाम न रहस्योद्घाटन करने के आधार पर यह बताया था कि घटना की लीपापोती कर दी जायेगी; सब ‘टायँ-टायँ फिफ्स’ हो जायेगा।

हमने इस काण्ड को साक्षी भी दिया है। उसी समय आदित्यनाथ योगी और उनके सारे सम्बन्धित अधिकारी भी घटनास्थल पर जाते हुए दिख रहे थे और आधे घण्टे पहले ही आने-जाने के रास्ते बन्द कर दिये गये थे; केवल उच्चस्तरीय प्रशासनिक अधिकारियोँ के वाहन आ-जा रहे थे।

अब बताया जा रहा है कि उक्त भीषण अग्निकाण्ड के कारणो की जाँच करायी जा रही है।