● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
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आज (१६ जनवरी) एक शिक्षण-संस्थान मे मध्यप्रदेश सहायक प्राध्यापक (हिन्दी)-पदहेतु साक्षात्कार-परीक्षा/मौखिक परीक्षा के लिए चयनित अभ्यर्थियोँ मे से कुछ मेधावी अभ्यर्थियोँ के ‘अभ्यास साक्षात्कार-परीक्षण’ (मॉक इण्टरव्यू टेस्ट) मे निमन्त्रित था। द्विदिवसीय ‘अभ्यास साक्षात्कार’ के प्रथम दिन मेरे साथ तीन विषय-विशेषज्ञ थे, जिनका चयन भी मैने किया था; क्योँकि वे तीनो सुपात्र विशेषज्ञ (एक महिला प्राध्यापक और दो पुरुष प्राध्यापक) थे। वह साक्षात्कार-परीक्षण अत्यन्त प्रभावकारी था; क्योँकि अनुभव-सम्पन्न विशेषज्ञोँ ने हिन्दी-साहित्य से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण प्रश्न किये थे और प्रतिप्रश्न भी; प्रतिप्रश्न अधिक किये गये थे। लगभग तीन घण्टे के ‘अभ्यास साक्षात्कार’ मे हमने प्रत्येक अभ्यर्थी को ‘भीतर से बाहर तक’ पूरी तरह से खंगाल दिया था।
हमने मुक्त भाव से उनके धैर्य का परीक्षण किया था एवं शरीर की भाषा का अध्ययन और आकलन (‘आंकलन’ अशुद्ध है।) भी, जिसमे वे ‘डोल’ गये थे। कुछ की आँखोँ से ‘अतिरिक्त’ आत्मविश्वास झाँक रहा था। हमे ऐसा प्रतीत हुआ, मानो उन अभ्यर्थियोँ ने उस ‘अभ्यास साक्षात्कार’ को, साक्षात्कार-परीक्षण से पूर्व ‘हस्तामलक’ (सहज प्राप्य) समझ लिये होँ। जब हमने विविध कोण से साहित्य, भाषा, व्याकरण तथा भाषाविज्ञान के प्रश्नतीर चलाने आरम्भ कर दिये थे तब अभ्यर्थियोँ को अनुभव होने लगा था कि वास्तव मे, ‘अभ्यास साक्षात्कार-परीक्षण’ का सामना करना कितना कष्टसाध्य होता है, यद्यपि दो अभ्यर्थियोँ की तत्परता संतोषजनक लग रही थी; अपेक्षाकृत आत्मविश्वास एवं प्रश्नबोध अत्युत्तम था।
अन्त मे, हमने समस्त अभ्यर्थियोँ को साक्षात्कार-परीक्षा के लिए कैसे तत्परता प्रदर्शित करनी चाहिए एवं उत्तर देने से पूर्व और पश्चात् कैसी मानसिकता विकसित करनी चाहिए, इसके सैद्धान्तिक और व्यावहारिक पक्षोँ को समझाते हुए, यथोचित प्रशिक्षण भी किये थे।
कल (१७ जनवरी) हमारी साक्षात्कार-शैली कुछ हटकर रहेगी, जिससे कि मध्यप्रदेश मे इस माह के अन्त मे आयोजित साक्षात्कार-परीक्षा मे उपर्युक्त अभ्यर्थी पूर्ण आत्मविश्वास के साथ किसी प्रकार के प्रश्नतीर को अपने ‘प्रत्युत्पन्नमति’ और ‘सामान्य सम्बोध’ के बल पर निष्क्रिय करने मे समर्थ हो जायेँ।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १६ जनवरी, २०२५ ईसवी।)