दौड़ गया जो कठिन डगर पर, यहाँ विजेता बना वही

चलने वाले ही गिरते हैं, डरने वाला चला नहीं।
हार गया जो देख मुसीबत, यहाँ अपाहिज बना वही।

मेहनत का फल मीठा होता, राह किन्तु थोड़ी है मुश्किल।
दौड़ गया जो कठिन डगर पर, यहाँ विजेता बना वही।

कर्म करो; अधिकार तुम्हारा, केवल कर्मो पर ही है।
लोभ छोड़ जिसने जो चाहा, यारों उसको मिला वही।

लक्ष्य तुम्हारा यदि पावन है, कुछ भी मत परवाह करो।
निर्भय होकर जो कदम बढ़ा, मंजिल आखिर बना वही।

श्रेष्ठ ग्रन्थि है सबसे घातक, संयम ताकत बहुत बड़ी।
झुकना जिसने सीख लिया हो, आखिर मे भी तना वही।