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इंग्लैण्ड भारत के विरुद्ध लड़ते-लड़ते हारा!

भारत-इ़ग्लैण्ड एकदिवसीय अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट-शृंखला


★ समीक्षक– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

बेशक, भारत ने भले ही आज (२८ मार्च) इंग्लैण्ड के विरुद्ध खेले गये तीन मैचों की शृंखला के अन्तिम मैच में इंग्लैण्ड को पराजित कर शृंखला जीत ली हो; फिर भी यह विजय भारतीय दर्शकों के लिए बेस्वाद रहा। इसका मुख्य कारण भारतीय बल्लेबाज़ों की अच्छी बल्लेबाज़ी के बाद भी उसका निम्नस्तरीय क्षेत्रक्षण और खेलमैदान में गम्भीरता का न दिखना रहा, जो भारतीय दल का हास्यास्पद पक्ष भी रहा है।

तीन मैचों की एकदिवसीय अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच-शृंखला का पहला मैच भारत ने ६६ रनों से जीता था; दूसरे मैच में इंग्लैण्ड ने भारत को ६ विकेटों से पराजित किया था। इस प्रकार दोनों दल १-१ मैच जीतकर शृंखला में बराबरी पर चल रहे थे। तीसरा और अन्तिम एकदिवसीय मैच दोनों ही दलों के लिए “करो या मरो” का विषय था।

लगातार तीनों मैचों में भारतीय कप्तान विराट कोहली को ‘सिक्का-उछाल’ के समय मुँह की खानी पड़ी थी, जिसका मनोवैज्ञानिक लाभ इंग्लैण्डदल को मिलता दिखा था। यही कारण है कि जिस रणनीति के अन्तर्गत इंग्लैण्ड के खिलाड़ियों ने क्षेत्ररक्षण और बल्लेबाज़ी की थी, उन्हें देखते-समझते हुए, भारतीय क्रिकेटदल का जीतना कहीं से भी नहीं दिख रहा था।

प्रथम मैच में इंग्लैण्ड लगभग जीता हुआ मैच ६६ रनों से हारा था। द्वितीय मैच में शानदार वापसी करते हुए, इंग्लैण्डदल ने भारत के विरुद्ध क्षेत्ररक्षण और बल्लेबाज़ी करते हुए, भारत को बहुत आसानी से ६ विकेटों से पराजित कर, यह बता दिया था कि उसे विश्व में वरीयता-क्रम में ‘पहला स्थान’ क्यों मिला है।

तृतीय और निर्णायक मैच में रहस्य-रोमांच से भरपूर वातावरण में इंग्लैण्ड ने लगभग जीता हुआ मैच अपने हाथों से जाने दिया था। अन्तिम मैच में भारतीय दल ने बल्लेबाज़ी करते हुए, ३२९ रन बनाये थे। भारत के आरम्भिक बल्लेबाज़ और मध्यम क्रम के बल्लेबाज़ों की शानदार बल्लेबाज़ी के चलते, भारत ने एक सम्मानजनक रनसंख्या बना ली थी। शिखर धवन (६७ रन), ऋषभ पन्त (७८ रन), हार्दिक पण्ड्या (६४ रन) तथा शार्दूल ठाकुर (२१ गेंदों पर ३० रन) आक्रामक पारी खेलकर अपनी प्रहारक क्षमता सार्वजनिक कर दी है।

एक समय लग रहा था कि भारतीय दल की कुल रनसंख्या ३७५-४०० के मध्य रहेगी; किन्तु पाँचवें विकेट और उसके बाद के विकेट खिलाड़ियों की जल्दबाज़ी के कारण गिरते दिखे थे। यही कारण था कि भारतीय बल्लेबाज़ निर्धारित पचास ओवर खेलने में असमर्थ सिद्ध हुए। इंग्लैण्ड के गेंदबाज़ मार्क वुड, आदिल राशिद/रशीद प्रभावकारी सिद्ध हुए थे।

भारत-द्वारा इंग्लैण्ड को जीत के लिए ५० ओवरों में कुल ३३० रन बनाने का लक्ष्य दिया गया था, जो आसान नहीं दिख रहा था। भारतीय क्षेत्ररक्षण बिखरा-छितरा दिख रहा था, जिसके कारण भारतीय खिलाड़ियों ने पाँच आसान कैच छोड़े थे। हार्दिक पण्ड्या ने दो, ऋषभ पन्त ने एक, शार्दूल तथा नटराजन् ने एक-एक कैच छोड़े थे। नटराजन ने गेंद पर नियन्त्रण न होने के कारण कई ‘वाइड बॉल’ फेंके थे। भारतीय खिलाड़ियों ने रन-आऊट के तीन अवसर गवाँये थे। भारत ने ४८.२ ओवरों में ३२९ रन बनाये थे, जिसके उत्तर में इंग्लैण्डदल ५० ओवरों में ९ विकेट पर ३२२ रन बना सका था। शार्दूल और भुवनेश्वर ने प्रभावकारी गेंदबाज़ी की थी; प्रसिद्ध कृष्णा और नटराजन असफल सिद्ध रहे।

इस शृंखला के तीसरे मैच में ऐसा पहली बार देखने को मिला कि आरम्भ के कुछ ही ओवरों में इंग्लैण्ड के दो बल्लेबाज़ आऊट किये गये थे। उसके आरम्भिक बल्लेबाज़ रॉय और बेयरेस्टो असफल रहे। बेन स्टोक्स ने बेहतर खेला; परन्तु ३५ रनों पर आऊट कर दिये गये थे। कप्तान बटलर १५ रन बनाकर चलते बने थे। डेविड मलान ने शानदार अर्द्धशतक पूरा किया था। लिविंगस्टोन ने भी तेज़ी में रन (३० गेंदों में ३६ रन) बनाये थे।

इंग्लैण्ड का जो बल्लेबाज़ भारतीय खिलाड़ियों और दर्शकों का रक्तचाप बढ़ाता रहा, वह था, सैम करन। सैम करन जब तक क्रीज़ पर थे, विजयश्री इंग्लैण्ड के ही पक्ष में जाती नज़र आ रही थी। ऐसा लग रहा था, मानो उस खिलाड़ी ने अपने ही बल पर इंग्लैण्डदल को जिताने का संकल्प कर लिया हो। ऐसा उसकी ज़बरदस्त प्रहारकशक्ति को देखकर लग रहा था। यही कारण था कि वे ८३ गेंदों में ९५ रन बनाकर अविजित रहे।
भारतीय दल ७ रनों से जीतकर यह शृंखला २-१ से जीती है। इंग्लैण्ड-बल्लेबाज़ सैम करन को ‘प्लेअर ऑव़ द मैच’/ ‘मैन ऑव़ द मैच’ और जॉनी बेयरेस्टो ‘प्लेअर ऑव़ द सीरीज़’/’मैन ऑव़ द सीरीज़’ का पुरस्कार दिये गये थे।

उल्लेखनीय है कि भारत ने हाल ही में भारत-इंग्लैण्ड के मध्य खेले गये टेस्टमैच, टी-२० तथा एकदिवसीय अन्तरराष्ट्रीय मैच-शृंखलाएँ जीत ली हैं।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २८ मार्च, २०२१ ईसवी।)