★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ को मालूम था कि रूस और युक्रेन के बीच युद्ध की स्थिति बननेवाली है; किन्तु उसे उसने गम्भीरता से नहीं लिया। यही कारण है कि भारत से जाकर युक्रेन के शिक्षालयों मे शिक्षा ग्रहण करनेवाले विद्यार्थियों की ज़िन्दगी अब ख़तरे मे दिख रही है। इसका मुख्य कारण उत्तरप्रदेश के चुनाव मे समस्त सरकारी तन्त्र को झोंक देना है और भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमन्त्री बनकर घोर आपत्तिजनक ढंग से उत्तरप्रदेश के चुनाव को प्राथमिकता देते रहना है। आज ठीक वही परिदृश्य है, जब भारत के प्रवेशद्वार पर ‘कोविड’ दस्तक दे रहा था और वस्तुस्थिति से अवगत होते हुए भी,’मोदी ऐण्ड कम्पनी’ संयुक्त राज्य अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की आवभगत करने मे जुटी थी।
अब वास्तविकता यह है कि ‘न्यू इण्डिया की मोदी-सरकार’ की घोर लापरवाही के कारण भारतीय विद्यार्थियों और अन्य जन का जीवन ख़तरे मे पड़ चुका है।
प्रश्न है, पहली बार जब एक विमान को भारतीयों को लाने के लिए भेजा गया था तब उस दिन और उसके दूसरे दिन तक २०-२५ विमान भेजकर सभी भारतीयों को वापस क्यों नहीं लाया गया था, जबकि युक्रेन के राष्ट्रपति ब्लादिमीर ज़ेलेंस्की ने आसन्न ख़तरे से सभी को आगाह कर दिया था? ‘मोदी-सरकार’ ने वैसा क्यों नहीं किया था, इसे वही बता सकती है। उस समय तक युक्रेन की स्थिति उतनी भयावह नहीं थी जितनी कि अब दिख रही है।
युक्रेन मे रह रहे भारतीय विद्यार्थियों ने सुस्पष्ट शब्दों मे आरोप लगाते हुए कहा था– हमसे एअर इण्डियावाले २०-३० हज़ार रुपये अधिक बढ़ाकर जहाज़ का किराया ले रहे हैं।
दो दिनो पहले ‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ की ओर से यह सूचना प्रसारित की गयी थी– विद्यार्थियों की स्वदेश-वापसी निश्शुल्क करायी जायेगी।
बहरहाल, अब युक्रेन मे स्थिति अत्यन्त संवेदनशील हो चुकी है। युक्रेन मे फँसे भारतीय विद्यार्थियों के माता-पिता और अभिभावकजन अतीव चिन्तित दिख रहे हैं।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २८ फ़रवरी, २०२२ ईसवी।)