छात्र नेताओं ने छात्र हित की लड़ाई को दिया हिंसात्मक रूप

अवनीश मिश्रा –

एक नेहरू की हठधर्मिता के कारण देश के टुकड़े हुए व बर्बादी हुई । उन्हीं नेहरू के विचारों का दूसरा जीता जागता उदाहरण जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय है । यहाँ के छात्र भी हठधर्मी सियासत की राह पर चल रहे है । तोड़फोड़, बर्बादी, भारत तेरे टुकड़े होंगे, आतंकियों को आजाद कराने के नारे आदि अराजकतावादी हरक़तें क्या शिक्षा के मंदिर में होनी उचित हैं ?

छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच चल रही हक की लड़ाई ने कल हिंसात्मक रूप ले लिया। जिसके चलते देश के जाने-माने विश्वविद्यालय जेएनयू में छात्रों ने अपने ही विश्वविद्यालय के कुलपति के घर पर हमला किया। अक्सर देखा गया है कि देश के कई विश्वविद्यालयों में छात्र अपने विश्वविद्यालय प्रशासन और वहां की कार्यशैली से नाखुश रहते हैं । जिसके चलते वह धरना-प्रदर्शन व अलग-अलग तरह के जागरुकता अभियान भी चलाते हैं । लेकिन ऐसे हिंसात्मक हो जाना कहीं न कहीं देश के लिए बहुत ही गंभीर विषय है । अपने ही विश्वविद्यालय के कुलपति के घर में तोड़फोड़ उनसे हिंसात्मक व्यवहार और उनकी धर्मपत्नी को बंधक बनाना यह किसी छात्र को न शोभा देता है और न ही कोई नैतिकता रखने वाला छात्र ऐसा करेगा । फिर छात्रों को ऐसे क्रियाकलापों को अंजाम देने के लिए किस का सहयोग मिल रहा है ? विचार अवश्य करें !