श्री मुरलीमनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बलिया की एकदिवसीय भाषिक कर्मशाला सम्पन्न

“स्वाध्याय के प्रति सबको रुचि जाग्रत् करनी होगी”– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

 प्रयागराज से पधारे व्याकरणवेत्ता और भाषाविज्ञानी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की मार्गदर्शक के रूप मे एकदिवसीय भाषिक कर्मशाला का आयोजन महाविद्यालय आयोजन समिति' की ओर से  राजभाषा-पखवाड़ा के अन्तर्गत २७ सितम्बर को श्री मुरलीमनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बलिया के राजेन्द्र प्रसाद-सभागार मे किया गया, जिसका विषय था– 'हमारे दैनिक जीवन मे हिन्दी-भाषा की उपयोगिता और महत्ता'।
 
आरम्भ मे, हिन्दी-विभागाध्यक्ष प्रो० बृजेशकुमार सिंह ने मार्गदर्शक एवं अन्य अतिथियोँ का स्वागत किया। मार्गदर्शक आचार्य पं० पृथ्वीनाथ का परिचय देते हुए, वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो० जैनेन्द्रकुमार पाण्डेय ने कहा, "हमलोग जिनकी पुस्तक का अध्ययन करते थे, उन्हेँ अपने बीच पाकर अतीव हर्ष और गर्व का अनुभव हो रहा है। आज आप सबके एक ऐतिहासिक क्षण होगा, जब आप सब हमारे मार्गदर्शक के द्वारा दिये गये ज्ञान को धारण करते हुए, आत्मगौरवान्वित अनुभव करेँगे।''
  
मार्गदर्शक के रूप मे छात्र-छात्राओँ को सम्बोधित करते हुए, आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने कहा, "तुम सबको शब्दोच्चारण और लेखन के प्रति अतीव सजग और सतर्क रहना होगा; क्योँकि हिन्दी-भाषा की लिपि की वैज्ञानिकता व्याकरण पर आधारित है। स्वाध्याय मे बहुत शक्ति होती है, जिसके प्रति तुम सबको रुचि जाग्रत् करनी होगी।''
  
इस अवसर पर आचार्य ने विद्यार्थी और अध्यापक-वर्गोँ को शताधिक शब्दोँ का शुद्ध लेखन-ज्ञान कराया। उन्होँने 'उनके लिए मैने दो फल लिए।' वाक्य को अशुद्ध बताते हुए, वाक्य-गठन के नियम से अवगत कराया। इसी वाक्य मे कहाँ पर 'लिए' का प्रयोग होगा और कहाँ पर 'लिये' का, इसका सकारण ज्ञान कराया था। उन्होँने विद्यार्थियोँ-द्वारा अशुद्ध शब्दोच्चारण 'फ़ल' को 'फल' उच्चारण करने का नियम समझाया। आचार्य ने 'लिए' को अविकारी शब्दोँ के अन्तर्गत आनेवाला अव्यय बताया, जबकि 'लिये' को विकारी शब्दान्तर्गत प्रयुक्त क्रिया-शब्द। कई उदाहरणो से 'लिए-लिये' मे अन्तर को समझाया, फिर लिखाया।
 
मार्गदर्शक के रूप मे पधारे आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने 'मिष्ठान', 'सृजन', 'रंग-बिरंगे', 'प्रश्न पूछना', 'फूल खिलना', 'आद्यान्त' इत्यादिक शब्दोँ को अशुद्ध बताते हुए, उनका शुद्ध रूप व्याकरणीय धरातल पर सोदाहरण प्रस्तुत किया। 'ड़', 'ण', 'गुड़-गुण',  'बड़ा'-'बड़ी', 'नाप-माप', 'बहुमत' इत्यादिक शब्दोँ का शुद्धतापूर्वक बोध कराया।

इससे पूर्व, आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का  महाविद्यालय-हिन्दीविभाग की ओर से एक स्मृतिचिह्न भेँटकर अभिनन्दन किया गया था।
 
इस अवसर पर प्रो० बृजेश सिंह, प्रो० अखिलेशकुमार राय, प्रो० धर्मेन्द्र सिंह, प्रो० जैनेन्द्रकुमार पाण्डेय, प्रो० अशोक सिंह, डॉ० संजीवकुमार मिश्र, डॉ० अतुलकुमार राय और डॉ० इन्दप्रताप सिंह उपस्थित थे। अन्त मे, राष्ट्रगान से कर्मशाला का समापन हुआ। वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो० जैनेन्द्रकुमार पाण्डेय ने कर्मशाला का प्रभावक संयोजन और संचालन किया था।