जयति जैन “नूतन”-

इतना ना इतराओ यारो
रावण को जलाकर
खुद के अंदर मारो रावण
जिओ सम्मान पाकर।
सिर्फ पुतले जलाने से
कुछ नहीं होने वाला
ना लोभ मिटने वाला
ना मान बदलने वाला
मन में बैठे राक्षस को
समझाओ बहिला फुसलाकर
ना माने तो मारो रावण
मन को फिर समझाकर।
बाहरी रावण जलाने से
कुछ नहीं होने वाला
ना सोच बदलने वाली
ना स्वरूप बदलने वाला।