पवन कश्यप (युवा गीतकार, हरदोई)-

यदि नयन रोते रहे संताप होगा।
भूल जाओगे हमें यह पाप होगा।।
हरि से हरि नारद बने थे,
प्रेम मे बस वह सने थे।
शब्दों के फेरो में फसकर,
मायूसी के बादल घने थे।।
तुम अगर ऐसे ही मेरा मन छलोगे,
फिर हमारा आपको एक श्राप होगा,
भूल जाओगे हमें यह पाप होगा ।।
ऋषियों से हमने सुना है,
प्रेम को सबने चुना है।
नाम जपना काम अपना,
नाम में तुमको बुना है।।
यदि तपस्या का फल हमें मिल जायेगा,
तो ह्रदय के हित में पूरित जाप होगा।
भूल जाओगे हमें यह पाप होगा ।।
सो गए ? हम जागते है,
दूर क्यों वो भागते है।
सर्वस्व हमने दे दिया,
कुछ नही हम मांगते है।।
फिर भला इन दूरियों का क्या अर्थ है,
दूरी कितनी है सही क्या नाप है ।।
भूल जाओगे हमें यह पाप है ।।