गर चुभती है जहाँ को सच्चाई, हमें कोई हर्ज नहीं

राजन कुमार साह- (Writer/Motivator)


जिंदगी एक जंग है, यूँ हार मानते नहीं।
गर हो खडे मैदान में, कभी छोड़ भागते नहीं।।

है जोरावर दुश्मन का , हम भी किसी से कम नहीं।
गर हो हौसला बुलंद, करे पराजित किसी मे दम नहीं।।

राह-ए-मंजिल कांटा ही कांटा,होते कभी हताश नहीं।
होत असफल बारंबार ये शर्मिंदगी की बात नहीं।।

गर हो गलतियां, कर कबूल… कभी हिचकते नहीं।
भांडा किसी और के सर ,यूँ कभी फोडते नहीं।।

नाम और पहचान हो खुद का,भले वो छोटे सही।
झूठी शान ,कर दिखावा ये मेरी फितरत में नहीं।।

झूठो से प्रेम ,सच्चाई से खेल सकूं कभी झेल नहीं।
गर किए -वादे निभाओ,जाए जान कोई गम नहीं।।

गर चुभती है जहाँ को सच्चाई, हमें कोई हर्ज नहीं।
हो खुश या हो नाखुश, कभी तथ्यों को मड़ोरते नहीं।।

कर भरोसा खुद पर बन्दे, यहाँ कोई तेरा साथ नहीं।
सुनो सबकी करो अपनी जो लगे तुम्हें बात सही।।