जग की पीड़ा ,
पीड़ा में तुमको पाया
इस दुनिया की लय में
सब कुछ खोकर
यादों की छुई मुई सी धूप बन
बिखर रही जग में
प्रांतर के कोने में
छाया की सुखद रूप में
कल तुमको पाया ,आज
तुम्हारी यादों को
इस मौसम के मधुमास भरे दिन में
एक पल ठहरी राग -वेदना
जिसे सँजोया अलकों पर
रख अनुराग की बात
इस दुनिया की लय में !
आकांक्षा मिश्रा